तुर्की ओर सिरिया में अब तक की सबसे बड़ी तबाई भूकंप से अब तक 5000 लोगो की मौत, भारत सहायता के लिए आगे आया ।

विदेश न्यूज; तुर्की और सीरिया के लोगों ने सोमवार को तबाही का जो मंजर देखा , वो दशकों तक दर्द देने वाला है. यहां आए भूकंप से भयानक तबाही जारी है. दोनों देशों में अब तक 4890 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. भूकंप की तीव्रता 7.8 थी , भूकंप के चलते कंपन इतना तेज था कि हजारों इमारतें ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गईं , तुर्की प्रशासन का कहना है कि अभी तक 5606 इमारतें गिर चुकी हैं. तबाही का यही मंजर सीरिया में भी देखने को मिला है. भारतीय एयरफोर्स का C-17 विमान रेस्क्यू टीमों और राहत साम्रगी लेकर तुर्की के लिए रवाना हो गया है ।

दूसरी बार महसूस किए गई झटके

तुर्की में मंगलवार को दूसरी बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं ,भूकंप के झटकों की तीव्रता 5.4 थी. इससे पहले मंगलवार सुबह 5,9 तीव्रता का भूकंप आया था. तुर्की और सीरिया में सोमवार को 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था. भूकंप ने सीरिया और तुर्की में तबाही मचा दी । अब तक 4890 लोगों की मौत हो चुकी है । तुर्की और सीरिया में आए 7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप और उसके बाद के झटकों के कारण धराशाई हुई इमारतों में से और शवों के बरामद होने से मृतकों का आंकड़ा पांच हजार की संख्या को पार कर गया है. हजारों इमारतों के मलबे में बचे लोगों को ढूंढ़ने के लिए बचावकर्मी काम में लगे हुए हैं. दुनियाभर के देशों ने बचाव एवं राहत कार्य के प्रयास में मदद के लिए टीम भेजी है

तुर्की के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 10 प्रांतों में 1,651 लोग मारे गए और 11,119 लोग घायल हुए। विद्रोहियों द्वारा नियंत्रित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में दमिश्क सरकार और बचावकर्मियों के आंकड़ों के अनुसार, सीरिया के सरकारी कब्जे वाले क्षेत्रों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 968 हो गई, जिसमें 1,280 लोग घायल हुए हैं।


यूरोपीय आयोग के एक प्रवक्ता ने कहा कि तुर्की में आए भूकंप के मद्देनजर यूरोपीय संघ के 10 से अधिक खोज और बचाव दलों को जुटाया गया है। इसके अलावा, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, इज़राइल, रूस और चीन अन्य देशों में से हैं जिन्होंने सहायता की पेशकश की है। उत्तर-पश्चिम सीरिया में प्रवेश करने वाली सहायता पर कुछ राजनीतिक प्रतिबंधों को कम करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए कॉल उभरी हैं, जो देश का आखिरी विद्रोही-आयोजित एन्क्लेव है और भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। लोगों के सोते ही पहला भूकंप आया, और तीव्रता 7.8 मापी गई, जो कम से कम एक सदी में इस क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में से एक है। भूकंप के झटके साइप्रस और काहिरा तक महसूस किए गए। यूरोपियन मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) के अनुसार, प्रारंभिक आंकड़ों से पता चला है कि दूसरा बड़ा भूकंप 7.7 तीव्रता का था और 67 किमी (42 मील) उत्तर-पूर्व में कहारनमारस, तुर्की से 2 किमी की गहराई पर था। भूकंप विज्ञानियों द्वारा 100 से अधिक छोटे आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए हैं।

भारतीय सेना और एनडीआरएफ की टीम सहायता के लिए तुर्की पहुंची ।

NDRF की एक टीम राहत साम्रगी के साथ तुर्की पहुंच गई है ।इसके साथ ही भारत से NDRF की दूसरी टीम तुर्की के लिए रवाना हो गई , कोलकाता NDRF की इस टीम में 50 सदस्य हैं । इससे पहले जो टीम तुर्की पहुंची, उसमें 51 सदस्य थे ।


भारतीय सेना ने अपनी मेडिकल टीम को तुर्की भेजा है । इस टीम में 89 सदस्य हैं। तुर्की में प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय सेना फील्ड हॉस्पिटल की सविधा मुहैया कराएगी, इनमें आर्थोपेडिक सर्जिकल टीम, जनरल सर्जिकल स्पेशलिस्ट टीम, मेडिकल स्पेशलिस्ट टीमों के अलावा अन्य मेडिकल टीमों को शामिल किया गया है। ये टीम 30 बिस्तरों वाली चिकित्सा सुविधा स्थापित करने के लिए एक्स-रे मशीन, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र, कार्डिएक मॉनिटर और संबंधित उपकरणों से लैस है ।

WHO भूकंप को लेकर चिंतित ।


विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि वह तुर्की के उन क्षेत्रों के बारे में चिंतित है जहां से भूकंप के बाद कोई खबर नहीं मिली है। 1999 में, तुर्की में आज आए भूकंप के समान तीव्रता के झटके ने इज़मित को तबाह कर दिया, जिसमें 17,000 से अधिक लोग मारे गए। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने सोमवार को 1939 के बाद से देश के लिए सबसे खराब आपदा बताया है, जब एक भूकंप में 32,000 से अधिक लोग मारे गए थे और 100,000 से अधिक घायल हो गए थे।

तुर्की के राष्ट्रपति ने भूकंप से प्रभावित राज्यों में 3 महीने तक लगाया आपातकाल

तुर्की की अनादोलू समाचार एजेंसी ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के हवाले से रिपोर्ट किया है कि बड़े पैमाने पर भूकंप से प्रभावित 10 प्रांतों में 3 महीने की आपात स्थिति की घोषणा की गई है ।

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