प्रशासन के लाख दावों के बावजूद भी किसानों को डीएपी खाद के लिए परेशान होना पड़ रहा है। हर साल की तरह इस साल भी किसानों को जरूरत के हिसाब से पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रहा है। जरूरत और आपूर्ति के बीच का बड़ा अंतर ही किसानों को लिए परेशानी का सबब बन गया है। रबी सीजन में किसानों को बीज की बोवनी करने के लिए जिले में 78 हजार मैट्रिक टन खाद की जरूरत है, जबकि अभी तक 35 हजार मैट्रिक टन खाद ही किसानों को मिला है। जिसमें सबसे ज्यादा जरूरत 22 हजार मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत है, लेकिन अभी तक केवल 8 हजार मीट्रिक टन ही जिले में आया है। ऐसे में किसानों के सामने बड़ी समस्या बढ़ गई है।

गोदाम पर लग रही भीड़

बोबनी का रकवा बढ़ा, खाद की मांग भी। कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इस साल जिले में पिछले साल के मुकाबले 4.73 लाख हेक्टेयर रकवे की जगह 4.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से 3 लाख से अधिक हेक्टेयर क्षेत्र में सिर्फ गेहूं की बोवनी होनी है। इतने रकवा क्षेत्र में बोवनी के लिए अनुमान के तौर पर कृषि विभाग ने शासन को 78 हजार मैट्रिक टन खाद की डिमांड भेजी थी, लेकिन जिले में अब तक सिर्फ 35 हजार मैट्रिक टन खाद ही पहुंच सका है। इसमें भी किसानों को सिर्फ 24 हजार मैट्रिक टन खाद ही वितरित हो पाया है। जाहिर है कि बोवनी का समय निकलता जा रहा है और किसानों की जरूरत का 50 फीसदी खाद ही अब तक उन्हें नहीं मिला है।

विभाग कह रहा 75 फीसदी बोबनी हो गई

विभाग का दावा है कि अब तक 2.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी हो चुकी है यह कुल अनुमानित रकवे का 75 फीसदी है। वहीं, कृषि विभाग का ये भी कहना है कि किसानों के पास रबी सीजन की बोबनी के लिए 10 दिसम्बर तक का समय है। जबकि किसानों का कहना है कि आगामी 10 दिनों में उन्हें हर हाल में बोवनी करनी है, नहीं तो फसल पिछडऩे से अलग तरह की समस्याएं सामने आती हैं।

सबसे ज्यादा डीएपी की मांग और उसी का संकट

किसानों को फसल की बोवनी के पहले खेतों में डीएपी खाद की आवश्यकता होती है। यूरिया तो फसल की बोवनी के बाद छिड़का जाता है। इसलिए किसानों को सबसे ज्यादा जरूरत डीएपी की है, लेकिन केन्द्र सरकार पिछले कुछ सालों से डीएपी की निर्भरता को कम करने के लिए इसकी आयात कम कर रही है। जबकि इसके स्थान पर सुपर फास्फेट और एनपीके को वितरित किया जा रहा है। दिक्कत यहीं है कि किसान जब खाद वितरण केन्द्र पर डीएपी मांगते हैं तो उन्हें या तो सुपर फास्फेट दिया जाता है या डीएपी की अनुपस्थिति बताई जाती है।

आने वाली है पांच रैक

डीडीए कृषि ने बताया कि जिले को रबी मौसम 2022-23 में 1 अक्टूबर 2022 से 10 नवंबर तक 13392 मैट्रिक टन यूरिया, 10321 मैट्रिक टन डीएपी तथा 5788 मैट्रिक टन एनपीके प्राप्त हुआ है। जिसमें से 7877 मैट्रिक टन यूरिया, 9154 मैट्रिक टन डीएपी तथा 3850 मीट्रिक टन एनपीके का वितरण कृषकों को हो चुका है। वर्तमान में 5515 मैट्रिक टन यूरिया, 1167 मैट्रिक टन डीएपी तथा 1938 मैट्रिक टन एनपीके वितरण के लिए उपलब्ध है। आगामी समय में उर्वरकों की नियमित आपूर्ति होने से कृषकों को उर्वरक प्राप्त होने में कोई कठिनाई नही होगी। आगामी दिवसों में यूरिया की 3 रैक तथा डीएपी की 2 रैक जिले को प्राप्त होने वाली है।

परेशान किसान बोले

मामले में जब हमने परेशान किसानों राजाराम, विवेक राजपूत, कमला राय से बात की तो उनका कहना है कि हमें खाद नहीं मिलती तो रात में अलग-अलग जगह बुलाया जाता है। वहां से 200-300 रुपये ज्यादा लेकर पर्ची दे दी जाती है उसके बाद खाद मिलती है। विवेक राजपूत का कहना है एक बोरी की कीमत 1350 है पर हमें 1600 और 1650 में मिलती है। किसान मजबूर है उसे बेवजह परेशान किया जाता है जिससे परेशान होकर हम लोग ज्यादा पैसा देने को मजबूर हैं। कमला राय बताते हैं कि पहले रिस्वत के पैसे जमा करते हैं रात में अलग जगह बुलाते आएक आएक कर किसानों को कमरे में बुलाते और ज्यादा पैसे लेकर पर्ची पकड़ा देते हैं तब कहीं जाकर महंगी कीमत में खाद मिल पाता है।

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