मौसम समाचार: 800 करोड़ से अधिक राशि से बन रहे महाकाल लोक (पहले फेज) के लोकार्पण के लिए पीएम नरेंद्र मोदी मंगलवार को उज्जैन पहुंच रहे हैं। वे इसे श्रद्धालुओं को समर्पित करेंगे। पीएम मोदी मंगलवार शाम 6 बजे के लगभग महाकाल मंदिर पहुचेंगे। इस दौरान वे गर्भगृह से दर्शन कर 6.30 बजे महाकाल लोक का लोकार्पण करेंगे। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन को बारिश का अलर्ट किया है। भोपाल में रातभर से कभी रिमझिम तो कभी तेज बारिश का दौर चलता रहा।

मौसम समाचार: उज्जैन में अब तक 1 अक्टूबर से अब तक करीब 4 इंच बारिश हो चुकी है। अगले तीन दिन तक उज्जैन के साथ इंदौर और भोपाल समेत अधिकांश इलाकों में दोपहर बाद हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। ग्वालियर-चंबल में अधिक बारिश का दौर अभी दो दिन तक और रह सकता है। मौसम वैज्ञानिक एचके पांडे ने दैनिक भास्कर को बताया कि उज्जैन में प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है। प्रदेश में अभी दो से तीन दिन तक बारिश का दौर रहेगा। उसके बाद ही मौसम में कुछ बदलाव होने की संभावना है।

मौसम समाचार: सोमवार को राजधानी में सुबह से देर रात तक रुक-रुक कर बारिश होती रही। मंगलवा को भी दिन की शुरुआत बारिश के साथ हुई। सावन, भादों और क्वांर की शुरुआत भी ऐसी ही बारिश से हुई थी। सोमवार रात 10:45 बजे भदभदा डेम का एक गेट खोलकर बड़े तालाब से पानी निकाला गया। सीजन में यह नौबत 17वीं बार आई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि तीन सिस्टम के सक्रिय होने से भोपाल समेत प्रदेश के 85% हिस्से में पानी बरसा। भोपाल में छाए घने बादलों से रात 11:30 बजे तक करीब दो इंच से ज्यादा पानी बरसा। बड़े तालाब को भरने वाली कोलांस नदी में भी 4 फीट से ज्यादा पानी आ गया। वहीं नर्मदापुरम के पचमढ़ी और बैतूल क्षेत्र मे हो रही बारिश के बाद तवा डैम के गेट खोले गए। डैम के 9 गेट 7 फीट तक खोले गए है।

अक्टूबर में 237% ज्यादा बारिश हो चुकी है

बंगाल की खड़ी में बने सिस्टम के कारण उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में अच्छी बारिश हो रही है। यूपी में तो बारिश ने हाल बेहाल कर दिए हैं। मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल में भी रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है। श्योपुरकलां में 1200% से ज्यादा पानी गिर चुका है। 1 अक्टूबर से अभी तक की स्थिति में यूपी में सबसे ज्यादा करीब 700% और मध्यप्रदेश में करीब 215% ज्यादा पानी गिर चुका है। यूपी में इस दौरान करीब आधा इंच बारिश होती है, लेकिन अब तक वहां 5 इंच से बारिश रिकॉर्ड की चुकी है। एमपी में एक इंच के मुकाबले करीब तीन इंच पानी गिर चुका है।

अक्टूबर में सबसे ज्यादा बारिश वाले राज्य

मध्यप्रदेश के ग्वालियर-चंबल में बारिश ज्यादा होने का कारण

मध्यप्रदेश के 36 जिलों में औसत से भी बहुत ज्यादा पानी गिर चुका है। 9 जिलों में औसत से ज्यादा और तीन जिलों में सामान्य बारिश हुई है। तीन जिलों शहडोल, सिवनी और छिंदवाड़ा में सामान्य से कम और बालाघाट में सामान्य से बहुत ज्यादा कम बारिश हुई है। बीते तीन महीने से महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से सटे इलाकों में अच्छी बारिश हुई, लेकिन अक्टूबर में बारिश का ट्रेंड बदल गया। अब ग्वालियर, चंबल, बुंदेलखंड, बघेलखंड, मालवा और निमाड़ में बारिश ज्यादा मेहरबान है। इस कारण महाकौशल में ज्यादा बारिश नहीं होने से यह इलाके रेड जोन में हैं, यानी यहां पर सामान्य बारिश भी नहीं हुई है।

यहां हो रही तेज बारिश

इंदौर-उज्जैन के कुछ इलाकों में सोमवार दोपहर के बाद भारी बारिश हुई। ग्वालियर-चंबल में 4 दिन से हो रही बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। यहां अक्टूबर में अगस्त-सितंबर की बारिश जैसे हालात हैं। शिवपुरी में बारिश के कारण मड़ीखेड़ा बांध लबालब है। बांध का पानी अमोला पुल तक भरा है। पानी से पुल के सारे पिलर डूब गए हैं। 1.344 किमी लंबा अमोला पुल जिले का सबसे बड़ा पुल है। ग्वालियर में तिघरा बांध भी लबालब है।

नया सिस्टम 12 के बाद बदल सकता है मौसम

मौसम वैज्ञानिक एचके पांडे ने बताया कि अभी जो सिस्टम बन रहा है, उससे अगले 3 दिन तक बारिश का पूर्वानुमान है। हवाओं की रफ्तार दक्षिण-पूर्वी होने से अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिल रही है। यही सिस्टम ग्वालियर-चंबल में एक्टिव होकर अच्छी बारिश करा रहा है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी में बना नया सिस्टम एक्टिव होने लगेगा। यह बहुत स्ट्रॉन्ग है। इस सिस्टम से पहले ओडिशा और फिर छत्तीसगढ़ में बारिश होगी। इसके बाद यह मध्यप्रदेश में 12 अक्टूबर से असर दिखाना शुरू करेगा। सिस्टम स्ट्रॉन्ग होने से तीन से चार दिन अच्छी बारिश के आसार हैं।

बारिश से किसान परेशान

अक्टूबर में जोरदार बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बारिश से खराब फसलों के सर्वे के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा- बेमौसम बरसात के कारण कई जगह हमारे किसान भाइयों की फसलों को क्षति पहुंची है। वे चिंता न करें, सरकार उनके साथ खड़ी है। मैंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जहां किसानों की फसलों का नुकसान पहुंचा है, वहां तत्काल सर्वे का काम प्रारंभ करें। हम सर्वे भी करेंगे और राहत की राशि भी किसान को देंगे। किसानों को फसल बीमा का लाभ मिले, इसके लिए आवश्यक तैयारियों के निर्देश दिए हैं।

अक्टूबर में सबसे ज्यादा बारिश वाले जिले 

अक्टूबर में सबसे कम बारिश 

प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों की स्थिति 

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