1. राष्ट्रपिता गांधी पहली बार 1929 में आए थे भोपाल

गांधी जयंती स्पेशल:- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 93 साल पहले भााेपाल आए थे। इस दौरान यहां हुई जनसभा में महात्मा गांधी ने रामराज्य का अर्थ समझाया था। उनके स्वागत में बेनजीर मैदान को खादी के कपड़ों से सजाया था। उनके साथ कुमारी मीरा बैन, सीएफ एन्ड्रूज व महादेव भाई देसाई भी भोपाल आए थे।

गांधी जयंती समारोह:- इस मौके पर जमनालाल बजाज व डॉ. जाकिर हुसैन को भी खासतौर से बुलाया गया था। तत्कालीन नवाब हमीदुल्ला खां के आमंत्रण पर वे भोपाल आए थे। वे अहमदाबाद पैलेस के नजदीक स्थित राहत मंजिल में ठहरे थे। बेनजीर मैदान में 10 सितंबर 1929 को हुई जनसभा में महात्मा गांधी ने कहा था- ‘रामराज्य का मतलब हिंदू राज्य कतई नहीं है। रामराज्य से मतलब है, ईश्वर का राज। मेरे लिए राम और रहीम में कोई अंतर नहीं है।

गांधी जयंती समारोह:- सभा में आए लोग खादी के कपड़े पहन के आए थे राहत मंजिल से बेनजीर मैदान तक के रास्तों को खादी के कपड़ों से बने दरवाजे बनाकर उन्हें सजाया गया था। सभा स्थल की खादी से सजाया गया था तो मौजूद लोग खादी के वस्त्र धारण करके सभा में शामिल होने पहुंचे थे। राहत मंजिल के भीतर और बाहर भी खादी से साज-सजावट कराई गई थीं। इतिहास के जानकार एसएम हुसैन के मुताबिक महात्मा गांधी ने भोपाल में नवाब सुल्तान जहां बेगम को कॉटन की दरी पर बैठा देखकर उनकी दोस्त सरोजनी नायडू से पूछा था कि ये ऐसी ही सादगी से रहती है? तारीफ करते हुए बोले-बेगम को देशी चीजों से प्यार है।

यह भी खास… नवाब नहीं चाहते थे कि बापू की यात्रा का पता चले 

मध्यप्रदेश न्यूज़: भोपाल स्वातंत्र्य आन्दोलन स्मारक समिति सचिव डॉ. आलोक गुप्ता ने बताया कि नवाब हमीदुल्ला खां की कोशिश यही थी कि बापू की भोपाल यात्रा की हर जानकारी गुप्त रहे, ताकि राष्ट्रवादी गतिविधियों में रुचि रखने वाले व्यक्ति उनसे न मिल सके। डॉ. गुप्ता ने बताया कि बापू के स्टेशन से लौटते समय स्थानीय गुजराती वणिक मोड़ समाज द्वारा उनका सम्मान किया गया था। उन्हें हरिजन फंड के लिए 501 रुपए की धनराशि भी भेंट की गई थी। 1933 में हरिजन यात्रा के दौरान ट्रेन बदलने के लिए महात्मा गांधी कुछ समय के लिए भोपाल स्टेशन पर रुके। इसकी भनक लगने पर बड़ी संख्या में लोग वहां एकत्रित हो गए थे।

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