शुभ होता है घर पर कबूतरों का आना, घोंसला बनाना लाता है दुर्भाग्य

हिन्दू धर्म ज्योतिष शास्त्र, वास्तु शास्त्र और शकुन शास्त्र पर बहुत ज्यादा महत्त्व देता है। घर में किए जाने वाले प्रत्येक कार्य को इन तीनों शास्त्रों के विद्वानों से सम्पर्क करने के बाद ही करने का मानस बनाया जाता है। लाभ-हानि, शुभ-अशुभ का पूरा ध्यान रखा जाता है। कई चीजों को लेकर शुभ या अशुभ से जोडक़र देखा जाता है। जिस तरह से अपने भविष्य को लेकर ज्योतिष शास्त्र और घर कैसा हो उसके लिए वास्तुशास्त्र का सहारा लिया जाता है उसी तरह से घर में आने वाले पक्षियों के लिए शकुनशास्त्र का सहारा लिया जाता है। शकुनशास्त्र में पशु-पक्षियों से जुड़े संकेतों का खास महत्व माना गया है।

पशु, विशेष रूप से पक्षी हजारों वर्षों से आध्यात्मिक दुनिया के प्रतीक और संदेशवाहक रहे हैं। इस दुनिया में प्रत्येक जानवर एक निश्चित प्रकार के ग्रहों और ऊर्जा से जुड़ा हुआ है और इसलिए वे आपको संकेत दे सकते हैं या भविष्य में क्या होने वाला है, इसके बारे में सचेत कर सकते हैं।
कुछ पक्षियों को अपशकुन का शगुन माना जाता है और कुछ को सौभाग्य और खुशी का प्रतीक माना जाता है। कबूतर को सुख और शांति का प्रतीक माना जाता है। कुछ लोग कबूतर को मां लक्ष्मी का भक्त मानते हैं और घर में इसका आना शुभ बताते हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों का कहना है कि घर में कबूतर आना शुभ है लेकिन यदि वह घोंसला बनता है तो यह दुर्भाग्य लाता है। इसी तरह से यह भी कहा जाता है कि यदि आप अपने घर की छत पर कबूतरों या पक्षियों को दाना डालते हैं तो हर रोज प्रात: उठते ही सबसे पहले पूरी छत को साफ करना शुभ होता है और यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो यह आपके लिए दुर्भाग्य का कारण बनता है।
आज हम कबूतर या कबूतर के बारे में बात करेंगे कि क्या वे सौभाग्य और सकारात्मकता का संकेत देते हैं या दुर्भाग्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।


आलेख में दी गई जानकारियों को लेकर हम यह दावा नहीं करते कि यह पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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