अफीम नीति 2022-23 :- केंद्र सरकार द्वारा कुछ दिनों बाद नई अफीम नीति 2022-23 घोषित की जाएगी। अफीम नीति 2022-23 घोषित होने से पहले नीमच किसान संघ ने अपनी कई मांगों को लेकर वित्त मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा था। राजस्थान मध्य प्रदेश बॉर्डर पर भी किसान कार्यकर्ताओं द्वारा भी अफीम नीति 2022-23 में बदलाव के लिए मांग की गई थी। इसको लेकर संसद भवन में हुई बैठक में सांसद सुधीर गुप्ता ने अफीम किसानों के लिए वित्त मंत्रालय के समक्ष अपनी 26 मांगे रखी है। किसानों को उम्मीद है कि अफीम नीति 2022-23 में बदलाव जरूर आएगा।

वित्त मंत्रालय बैठक में सांसद सुधीर गुप्ता ने अफीम नीति में बदलाव के लिए रखी 26 मांगे, जानिए क्या क्या:-

अफीम समाचार:- प्रदेश में अफीम नीति 2022-23 के लिए हुए विभिन्न आंदोलनों और किसानों की मांगों को ध्यान में रखते हुए सांसद सुधीर गुप्ता द्वारा वित्त मंत्रालय बैठक में 26 मांगे रखी गई है। इनमें अफीम नीति 2021-22 में लागू किए गए कुछ नियमों को हटाने की मांग और अफीम नीति 2022-23 में कुछ नियमों को जोड़ने की मांगे भी शामिल है। चलिए जानते हैं सांसद सुधीर गुप्ता द्वारा वित्त मंत्रालय बैठक में कौन-कौन सी मांगे रखी गई है:-

जानिए अफीम नीति 2022 में होने वाले बदलाव

• सांसद सुधीर गुप्ता द्वारा बैठक में मांग रखी गई की नई अफीम नीति 2022-23 में अफीम किसानों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाया जाए और अफीम नीति 2022-23 का सरलीकरण किया जाए।
• बैठक में सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि आगामी अफीम नीति 2022-23 में लाइसेंस पात्रता हेतु 5.9 किलोग्राम हैक्टेयर मार्फिन औसत की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।
अफीम नीति 2021-22 में देरी से लाइसेंस मिलने एवं वायरस जनित बीमारियों से अफीम का औसत उत्पादन नहीं हो पाया। अतः आगामी अफीम नीति 2022 में अफीम किसानों को 3.5 किलोग्राम हेक्टेयर मार्फिन के आधार पर लाइसेंस प्रदान किए जाए।
• आगामी अफीम नीति 2022-23 में सभी अफीम किसानों को समय पर लाइसेंस देने और पट्टे वितरित करने को कहा गया है ताकि किसान समय पर अफीम की खेती कर सकें।
अफीम नीति 2022-23 की घोषणा सितंबर 2022 माह के दूसरे सप्ताह और अफीम किसानों को लाइसेंस वितरण सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में अनिवार्यत किए जाए।

अफीम नीति 2022-23 में हो सकतें हैं बड़े बदलाव

• मृतक किसानों के नामांतरण उनके उत्तराधिकारी जैसे पति, पुत्र, पत्नी, के अलावा मृतक किसान के विविध वैच वारिसान जैसे दत्तक पुत्र-पुत्री, पौत्र-पौत्री, या किसानों द्वारा आवेदन में दर्शाए गए। वारिसान उत्तराधिकारी के नाम पर नामांतरण की प्रक्रिया को आसान किया जाए और किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जाए।
अफीम नीति 2022 को नवाचार करते हुए अफीम लाइसेंस वितरण प्रक्रिया को अफीम किसानों के लिए ऑनलाइन किया जाए।
• सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट की प्रक्रिया और धाराओं पर पुनर्विचार कर एक टीम गठित की जाए एवं साथ ही डोडा चूरा में उपलब्ध नारकोटिक्स ड्रग्स नशीले पदार्थ की बहुत ही कम मात्रा के कारण एनडीपीएस एक्ट की परिधि से बाहर किया जाए।
अफीम फसल वर्ष 1995-96 के पश्चात प्राकृतिक आपदा,कमी,औसत या विभिन्न कारणों से कटे हुए अफीम लाइसेंस बहाल किए जाए।
अफीम नीति 2022 में सभी किसानों को सम्मान 10 आरी के पट्टे दिए जाएं और जो असली किसान उच्च गुणवत्ता पूर्ण मार्फिन औसत देते हैं उनके लिए बढ़े हुए भावों का टैरिफ बनाया जाए।
अफीम नीति 2022 में अफीम किसानों को एक से अधिक प्लाटों में अफीम बोने की अनुमति दी जाए।
• सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि किसानों के कृषि के खर्चे की तुलना में उत्पादित फसल की लागत नहीं निकल पा रही है। इस संबंध में सरकार लगातार एमएसपी में वृद्धि करती जा रही है और अफीम के मूल्यों में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। इस विषय पर भी कुछ विचार किया जाना चाहिए।
अफीम नीति 2022 में इस विषय पर भी संज्ञान किया जाए कि अफीम की फसल चोरी होने या नीलगाय द्वारा नष्ट करने पर अफीम किसान का लाइसेंस निरस्त नहीं किया जाए।
• अफीम किसानों को अफीम की गुणवत्ता का परिणाम लैब से प्राप्त होता है जो नीमच और गाजीपुर में हैं। यह व्यवस्था खत्म कर अफीम नीति 2022-23 में तोल केंद्र पर ही अफीम किसानों को अफीम गुणवत्ता बताने की व्यवस्था शुरू की जाए।
• अफीम किसानों की शिकायत है कि तौल केंद्र पर लिए गए सैंपल पर किए गए हस्ताक्षर पुनः जांच के बाद किए गए हस्ताक्षर से मिलान नहीं होते हैं कृपया अफीम नीति 2022 23 में निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाई जाए।

किसानों के हित में लिए जाएं अफीम नीति 2022-23 के फैसले

• अफीम फसल की गिरदावरी खड़ी फसल का मापन का काम अफीम फसल बोने के 45 से 50 दिन की अवधि के बीच पूरा किया जाए।
• अफीम नीति 2021-22 तक किसानों को लाइसेंस मार्फिन के आधार पर दिए जा रहे थे,तो ऐसी स्थिति में कच्चे तोल की अनिवार्यता निरर्थक है। इसके स्थान पर किसान अफीम को चीरा लगा रखा है, बस इतना ही रिकॉर्ड किया जाए। इससे तोल प्रक्रिया एवं मिलान प्रक्रिया के बीच समय और विवाद से बचा जाएगा।
• पूर्व निर्धारित अफीम नीति में 1998-2003 तक लाइसेंस 5 वर्षे की औसत गणना के आधार पर जारी किए गए थे लेकिन उसमें वह किसान वंचित रह गए थे जिन्होंने इन वर्षों में 1 वर्ष अफीम की खेती नहीं की थी। उन किसानों को अफीम नीति 2022 23 में शामिल किया जाए।
• अफीम नीति वर्ष 1955-96 से अफीम नीति 2022 तक स्वैच्छिक जमा अफीम लाइसेंस जारी किए जाए।
• अफीम मुखिया की शिक्षा को ध्यान में रखकर मुखिया बनावे और साथ ही स्पष्ट निर्देश दे कि मुखिया को कार्यालयों में ना बुलाया जावे और किसी भी अफीम अधिकारी से प्रत्यक्ष या प्रथक संपर्क ना रखा जाए।
• अफीम फसल वर्ष 2013-14 में ओलावृष्टि के कारण अफीम किसानों ने लाइसेंस खोए थे। उन किसानों के पास दस्तावेजी प्रमाण भी है जो पिछले वर्ष की नीतियों में शामिल नहीं हो पाए हैं। इस वर्ष नई अफीम नीति 2022-23 में इन सभी किसानों को जोड़ा जाए।
• भारत में खसखस की मांग को ध्यान में रखते हुए उत्पादन नहीं बल्कि किसानों के लिए अफीम के लाइसेंस बढ़ाने की ओर ध्यान दिया जाए।
• सीपीएस पद्धति के अंतर्गत निकले जाने वाले डोडा चूरा के भंडारण हेतु प्रस्तावित औद्योगिक इकाई एवं कारखाने का शीघ्र निर्माण कराया जावे।

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