5.9 मार्फिन की पात्रता समाप्त करने की सांसद ने दिल्ली में उठाया मुद्दा


नई अफीम नीति आने में अभी समय है, लेकिन अभी से ही तैयारियों का दौर शुरु हो गया है। मार्फिन पात्रता समाप्त करने की मांग जिले के अफीम काश्तकार लंबे समय से उठा रहे है। ऐसे में दिल्ली में अफीम नीति को लेकर हुई बैठक में सांसद सुधीर गुप्ता ने यह मामला उठाया है। अफीम नीति वर्ष 2022-23 को लेकर बैठक भारत सरकार वित्त मंत्रालय राजस्व विभाग के कार्यालय नार्थ ब्लॉक नई दिल्ली में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित हुई। इसमें सांसद सुधीर गुप्ता ने 26 सूत्रीय मांगो का पत्र सौंपा। जिसमें उन्होंने अफीम किसानों को नवीन अफीम नीति में अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने व सरलीकरण पर जोर दिया।

समय में जारी हो अफीम नीति
पिछले दो साल से अफीम नीति देरी से जारी हो रही है। ऐसे में इस बार सांसद ने बैठक में अफीम नीति को समय पर जारी करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। बैठक में संासद गुप्ता ने कहा कि आगामी अफीम फसल वर्ष 2022-23 में लायसेंस पात्रता के लिए 5.9 किलोग्राम हेक्टेयर मॉर्फिन औसत की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। क्योंकि फसल वर्ष 2021-22 में अफीम लायसेंस वितरण प्रक्रिया में देरी होने तथा बेमौसम बारिश और विभिन्न वायरस जनित बीमारियों से अफीम का तय औसत उत्पादन नहीं हो पाया। आगामी नीति में 3.5 किलोग्राम हेक्टेयर मार्फिन के आधार पर लायसेंस प्रदान किए। उन्होंने समय पर अफीम नीति जारी करने और पट्टे वितरित करने पर विशेष जोर दिया। ताकि किसान समय पर अफीम की खेती कर सके। अफीम नीति की घोषणा सितंबर माह के दूसरे सप्ताह तथा लायसेंस वितरण सितंबर माह के अंतिम सप्ताह तक अनिवार्यत किया जाए। मृतक किसानों के नामांतरण उनके उत्तराधिकारी के अलावा मृतक किसान के विधिक वैध वारिसान जैसे दत्तक पुत्र-पुत्री, पौत्र-पौत्री या किसान द्वारा आवदेन पत्र में दर्शाए गए। वारिसान उत्तराधिकारी के नाम पर नामांतरण करके प्रक्रिया को आसान किया जाकर किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जाए। अफीम लायसेंस वितरण प्रक्रिया में नवाचार करते हुए पात्र किसानों को लायसेंस आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की मांग की। सांसद गुप्ता ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट की प्रक्रिया व धाराओं पर पुन विचार के लिए एक कमेटी गठित करने की मांग की। साथ ही डोडाचुरा में उपलब्ध नारकोटिक्स ड्रग नशीले पदार्थ की बहुत ही कम मात्रा के कारण उसे परिधि से बाहर करने की मांग की।

अफीम नीति 2022-23 :- मालवा मेवाड़ में नई अफीम नीति 2022-23 घोषित होने से पहले मेवाड़ के अफीम किसान और संगठन सड़कों पर उतर कर लड़ाई के लिए तैयार हो गए हैं। मध्यप्रदेश और राजस्थान के किसानों का प्रतिनिधिमंडल ग्वालियर के डीएमसी से मिलने गया है वहीं नीमच के अफीम किसानों ने वित्त मंत्री को मांगे पूरी करने के लिए ज्ञापन सौंपा है। अफीम नीति 2022-23 में किसानों ने अफीम खेती करने के लिए कुछ नियमों को हटाने की मांग रखी है वहीं कुछ नए नियम जारी करने के लिए ज्ञापन सौंपा गया है। पिछले वर्ष अफीम नीति 2021-22 में भारत सरकार द्वारा अफीम खेती करने के लिए सीपीएस पद्धति लागू की गई थी जिसके कारण किसानों को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। इस कारण किसानों ने अफीम नीति 2022-23 आने से पहले ही आंदोलन करना शुरू कर दिया है।

अफीम की खेती के लिए अफीम नीति 2022-23 में संशोधन की मांग

क्या है सरकार द्वारा अफीम खेती के लिए लागू की गई सीपीएस पद्धति

अफीम नीति 2022-23 :- पिछले वर्ष में भारत सरकार ने अफीम किसानों के लिए अफीम की खेती करने के लिए विदेशी सीपीएस पद्धति लागू की थी। सीपीएस पद्धति में किसान अफीम के डोडे में चीरा लगाकर अफीम नहीं निकाल सकते हैं जबकि अफीम किसान को अपनी पूरी अफीम की फसल अफीम विभाग को देनी पड़ती है। इसके बाद विभाग द्वारा डोडे तोड़कर नई तकनीकी से सभी अफीम निकाली जाती है,और किसानों को पोस्ता दे दिया जाता है। यह पद्धति लागू होने के बाद किसानों को अफीम की खेती करने में काफी समस्याएं पैदा हुई जिसके कारण अफीम की खेती करने वाले किसान काफी नाराज थे। इसी कारण राजस्थान और मध्य प्रदेश के अफीम किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने अभी से सरकार के सामने अपनी मांगे रख दी है।

अफीम खेती की सीपीएस पद्धति से सभी किसानों को नाराजगी है।

अफीम नीति 2022-23 में संशोधन के लिए नीमच किसान संघ ने सौंपा ज्ञापन

अफीम नीति 2022-23 में संशोधन की मांग:- नई अफीम नीति 2022-23 में संशोधन करने के लिए मध्यप्रदेश के नीमच जिले में किसान संघ ने वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा को ज्ञापन सौंपा है। नीमच जिले के किसान संघ ने नई अफीम नीति 2022-23 में संशोधन करने के लिए कई मांगे की है जिसमें सीपीएस पद्धति को हटाने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा भी अफीम किसानों और किसान संघ द्वारा अफीम नीति 2022-23 में संशोधन के लिए प्रयास किया जा रहा है।

अफीम नीति 2022-23 में संशोधन के लिए नीमच किसान संघ ने सौंपा ज्ञापन

अफीम किसानों को सीपीएस पद्धति से होने वाले नुक़सान

सीपीएस पद्धति में अफीम की फसल से बिना चीरा लगाए अफीम निकाल लिया जाता है लेकिन अफीम के डोडे में अच्छा पोस्ता दाना तभी निकलता है जब डोडे पर चीरा लगाया जाता है।
सीपीएस पद्धति से अफीम किसानों को अच्छी क्वालिटी का पोस्ता दाना प्राप्त नहीं हो पाता है।
• गांव के गरीब मजदूर जो अफीम फसल पर लुआई-चिराई करके रोजगार प्राप्त कर रहे थे, उन्हें बेरोजगार होना पड़ गया है।
• सीपीएस पद्धति के कारण अफीम किसानों को रिस्क लेनी पड़ रही है और अफीम किसानों को फायदा नहीं मिल रहा है।

अफीम नीति 2022-23 में संशोधन के लिए किसान संघ द्वारा क्या-क्या मांगे रखी गई है।

अफीम नीति 2021-22 में घोषित हुए नए नियमों के कारण पिछले वर्ष अफीम किसानों को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा था। इस कारण नीमच जिले के अफीम किसान संघ ने नई अफीम नीति 2022-23 घोषित होने से पहले ही आंदोलन करना शुरू कर दिया है और सरकार के सामने ज्ञापन के जरिए कई सारी मांगे रखी है। किसानों द्वारा वित्त मंत्री के नाम पर अफीम नीति 2022-23 में बदलाव, परिवर्तन लिया संशोधन के लिए निम्न मांगे रखी है:-

अफीम नीति 2022-23 में किसान संघ ने मांग रखी है कि अफीम किसानों के पट्टे की मार्फिन के आधार पर गुणवत्ता जांच करना समाप्त की जाए।
• इसके अलावा संघ ने मांग रखी है की अफीम नीति 2022-23 में किसानों को नए अफीम पट्टे जारी किए जाए।
अफीम नीति 2022-23 में संशोधन के तहत अफीम का दाम बढ़ाने के लिए भी मांग की गई है।
• किसान संघ द्वारा अफीम नीति 2022-23 में सीपीएस पद्धति हटाने के लिए भी मांग की गई है।
• 1991 के बाद वाले सभी अफीम के पट्टे बहाल करने की मांग भी अफीम नीति 2022-23 के संशोधन में की गई है।

अफीम नीति 2022-23 में संशोधन के लिए मालवा मेवाड़ के किसानों, मध्य प्रदेश राजस्थान के अफीम किसान प्रतिनिधि मंडल एवं किसान संघ द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ दिनों बाद भारत सरकार द्वारा अफीम नीति 2022-23 घोषित की जाएगी।

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