सावन की एकादशी पर भोले की भक्ति में रमे श्रद्धालु : पशुपतिनाथ Mandsaur News

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पशुपतिनाथ महादेव मंदिर

शिवालयों में उमड़ रहे भक्त, दर्शन के लिए लग रही कतारें

मनोकामना अभिषेक में भी शामिल हुए श्रद्धालु

मंदसौर श्रावण मास में शिवालयों में भक्तों का तांता लग रहा हैं। सभी प्रमुख शिव मंदिरों में सुबह से भक्त पहुंच रहे हैं। रविवार को श्रावण मास की एकादशी पर भी काफी श्रद्धालु भगवान श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर पहुंचे। यहां मंदिर के बाहर नंदी हाल से भी दूर तक लाइन लगी रही। इसके अलावा मंदिर परिसर में चल रहे मनोकामना अभिषेक में भी श्रद्धालु शामिल हुए। शहर के नीलकंठ महादेव, अमलेश्वर महादेव, जागेश्वर महादेव, जलेश्वर महादेव सहित अन्य सभी जगहों पर भी काफी संख्या में भक्तों ने जल चढ़ाकर बिल्व पत्र अर्पित किए।

रविवार को श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर पर अलसुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। भक्तों की भीड़ के चलते यहां भी गर्भगृह तक पहुंचने में आधा घंटा तक लग गया। एकादशी का विशेष महत्व होने से भी भक्त भोलेनाथ को बिल्व पत्र अर्पित करने भी पहुंचे। रविवार को मनोकामना अभिषेक में 200 से अधिक श्रद्धालुओं ने शामिल होकर भोलेबाबा का आशीर्वाद लिया। श्री पशुपतिनाथ महादेव मंदिर परिसर में चल रहे मनोकामना अभिषेक के 11 वे दिवस रविवार को 200 से अधिक श्रद्धालुओं ने अभिषेक में भाग लेकर भोलेबाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रारंभ में भगवान श्री पशुपतिनाथ की प्रतीकात्मक प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर पूजन अभिषेक अजय ललिता रुनवाल, ओम प्रीति धनोतिया, विजय जैन, जितेंद्र शर्मा सीतामऊ, जनेश धनोतिया, सोमदत्त सिंह, विकास शर्मा आदि ने किया। अभिषेक आचार्य पं. विष्णुप्रसाद ज्ञानी ने कराया। उन्होंने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापक हैं। संसार के प्रत्येक जड़ और चैतन्य पदार्थ में ईश्वरीय सत्ता विद्यमान है। ईश्वर के तीन प्रमुख लक्षण हैं सार्वदेशिकत्व यानि ईश्वर सब जगह विद्यमान हैं। प्रत्येक क्षण में परमात्मा की सत्ता हैं ईश्वर स्वर्ग ही नहीं वरन नर्क में भी जीवों को अपनी सन्निाधि से वंचित नहीं करते हैं। सार्वभौमिकत्व याने ईश्वर सब को समान रुप से प्राप्य हैं वह सब के लिए हैं। मनुष्य, पशु, जीव कीट आदि सबके लिए ईश्वर का पक्षपात रहित प्रेम व वात्सल्य समान हैं। सार्वकालिकत्व याने ईश्वर प्रत्येक काल में उपलब्ध हैं वह सदैव हमारे साथ ही है। हम प्रतिक्षण ईश्वर की सन्निाधि में ही है। ईश्वर के इन तीन गुणो पर विश्वास करने वाला मनुष्य कभी भी दुःखी नहीं हो सकता और नहीं विकर्म नहीं कर सकता। धार्मिक कार्यों में हमारी सनातनी वेशभूषा धोती-कुर्ता पहनने एवं चोटी रखने का विशेष महत्व है। पूजा विधि-विधान में हिंदू सनातन संस्कृति के अनुसार हमारा गणवेश होने से हमारी पवित्रता और धर्म की रक्षा होगी। इसलिए जहां तक संभव हो जब भी हम यज्ञ-अभिषेक आदि धार्मिक कार्यों में सहभागी हो तो कम से कम स्वच्छ धुली हुई धोती पहन कर अवश्य जाना चाहिये। धार्मिक पूजा विधि विधान कार्यों में हमारी सनातन वेशभूषा गणवेश में ही जाना चाहिए जिससे पवित्रता और धर्म की रक्षा होगी।

माहेश्वरी महिला मंडल का सावन मेला 26 व 27 को

मंदसौर माहेश्वरी महिला मंडल के तत्वावधान में श्रावण के पवित्र माह में ‘सावन मेले’ का आयोजन 26 व 27 जुलाई को ‘रुद्राक्ष’ माहेश्वरी भवन, नयापुरा रोड मंदसौर पर किया जा रहा है। महिला मंडल अध्यक्ष राज चिचानी एवं सचिव संगीता मंडोवरा ने बताया कि इस मेले में विभिन्ना प्रकार के स्टाल लगाएं जाएंगे। इसमें भगवान की पोशाखे एवं झूले, राखियां, लेडिज सूट्स, हेयर एसेसीरिज आदि प्रमुख होंगे। अजमेर की साड़िया, रतलाम की ज्वेलरी, इंदौर के फेंसी आइटम व गिफ्ट आइटम आकर्षण का केंद्र रहेंगे। साथ ही मेले में फूड जोन भी रहेगा।

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