नई अफीम नीति 2022 2023 घोषित | afim niti 2022 23 | वर्ष 1998-99 के किसानों को सीपीएस पद्धति से मिलेंगे पट्टे

Afim niti 2022 23

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नई अफीम नीति घोषित 2022 23 | Afim Niti 2022 23

नई अफीम नीति जारी सीपीएस पद्धति के आधार पर मिलेंगे 10-10 आरी के पट्टे

केंद्र सरकार ने नई अफीम नीति 2022-23 घोषित कर दी। नई नीति से मंदसौर, नीमच सहित अफीम किसानों में हर्ष है। इस बार सभी किसानों को समान रूप से 10-10 आरी के पट्टे मिलेंगे। वहीं वर्ष 1998 99 तक के किसानों को सीपीएस पद्धति से पट्टे मिलेंगे। इससे क्षेत्र मं रकबा बढ़ेगा। इसी के साथ ही किसानों की संख्या मं भी इजाफा होगा। एनडीपीएस के आरोप से मुक्त किसान भी पात्र होंगे।

जानिए इस बार किसानों को कितने आरी के मिलेंगे पट्टे और सीपीएस के लिए क्या रहेगा

वित्त मंत्रालय ने अफीम नीति 2022-23 की घोषणा कर दी है। इस अफीम नीति का राजपत्र में प्रकाशन भी हो गया है। इस बार वित्त मंत्रालय ने पात्र किसानों को 10-10 आरी का पट्टा देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त भी कई बिंदुओं पर विचार कर वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2022-23 की अफीम नीति को जारी किया है। वर्ष 2022-23 की अफीम नीति के प्रमुख बिंदू- – सभी पात्र किसानों को 10-10 आरी के पट्टे दिए जाएंगे। – किसान 2 से अधिक भूखंडों पर अफीम की बुवाई कर सकेंगे। – काश्तकार यदि चाहे तो लाइसेंस प्राप्त करने के लिए पट्टे पर दूसरो की भूमि ले सकता है। इसकी अनुमति रहेगी। – आगामी वर्ष 2022-23 में प्रति हेक्टेयर 5.9 किलोग्राम मार्फिन देनी होगी। – 2019-20, 2020-21 व 2021-22 के दौरान फसल की जुताई करने वाले किसानों को वर्ष 2023-24 के लिए पात्र नहीं माना जाएगा। – लुइनी-चिरनी में 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से उपर मार्फिन देने वाले किसानों को भी 10-10 आरी के पट्टे दिए जाएंगे। – 1999 से 2021 तक 6 प्रतिशत से अधिक मार्फिन देने वाले सभी किसानों को पट्टे दिए जाएंगे। – सीपीएस पद्धति में 3 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से उपर तथा 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से नीचे मार्फिन देने वालों को भी 10-10 आरी के पट्टे दिए जाएंगे। – सीपीएस पद्धति के तहत लगभग 15 हजार नए पट्टे पढ़ सकते हैं।

afim niti 2022- 23 लाइसेंस की शर्तें

किसी भी किसान को तब तक लाइसेंस मंजूर नहीं किया जाएगा जब तक वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा न करता हो/करती हो

(1) उसने कभी भी अफीम पोस्त की अवैध खेती न की हो तथा स्वापक औषधि तथा मन:प्रभावी द्रव्य पदार्थ अधिनियम, 1985 और उसके अंतर्गत बनाये गए नियमों के अंतर्गत उस पर किसी अपराध के लिए किसी सक्षम न्यायालय में आरोप नहीं लगा सिद्ध किया गया हो।

(2) उसने फसल वर्ष 2021-22 के दौरान पोस्त की खेती के लिए लाइसेंसशुदा वास्तविक क्षेत्र से 5% ‘क्षम्य क्षेत्र’ से अधिक क्षेत्र में खेती न की हो।

(3) फसल वर्ष 2021-22के दौरान उसने केन्द्रीय नार्कोटिक्स ब्यूरो/नार्कोटिक्सआयुक्त द्वारा किसानों को जारी किन्हीं
विभा
गीय अनुदेशों का उल्लंघन नहीं किया हो।

अफीम नीति 2022 23 – खेती हेतु पात्रता

1).वे किसान जिन्हों से फसल वर्ष 2021-22 में अपनी सम्पूर्ण खड़ी पोस्ट फसल की इस बारे में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार तथा केन्द्रीय स्वापक ब्यूरो की निगरानी में जुताई करा दी हो: किसान जोकि फसल वर्ष 2021-22 में लाइसेन्स पाने के पात्र थे लेकिन किसी कारण से वे लाइसेन्स प्राप्त नहीं कर पाये या लाइसेन्स जारी नहीं किया जा सका, या जिन्होने लाइसेन्स जारी होने के बाद भी किसी कारण से अफीम की खेती वास्तव में नहीं की थी:

2).किसी कानूनी उत्तराधिकारी को लाइसेन्स अंतरित किए जाने के मामले में मृतक किसान के द्वारा किए गए जमा के औसत पर भी जमा की जानेवाली अफीम के कुल औसत की गणना करते समय ध्यान दिया जायेगा:
मृतक किसान के कानूनी उत्तराधिकारियों में से ऐसा कोई भी उत्तराधिकारी जिसे विधिवत प्रक्रिया का अनुपालन करने के बाद निर्धारित किया गया हो और वह फसल वर्ष 1999-2000 से लाइसेन्स का पात्र हो, लाइसेन्स प्राप्त नहीं कर पायेगा यदि उसके यहाँ कानूनी उत्तराधिकार को लेकर कोई विवाद चल रहा हो:

3).वे किसान जिनके लाइसेन्स को फसल वर्ष 1999-2000 से 2021-22 के दौरान इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि उन्होने घटिया किस्म की अफीम जमा कराई थी लेकिन नीमच या गाजीपुर के सरकारी अफीम क्षारोद कारख़ाना में किए गए परीक्षण से पता चला कि उनमें मोर्फीन का अवयव 6% से अधिक था:

4)वे किसान जोकि लांसिंग के बाद अफीम के गोंद को प्राप्त करने के लिये अफीम पोस्ट की खेती करने के लिये लाइसेन्स प्राप्त करने के पात्र हों, बशर्ते कि वे स्वेच्छा से यह विकल्प लें कि वे ऐसे पोस्ट भूस के उत्पादन के लिये अफीम पोस्त की खेती करेंगे जिसकी लंसिंग से उसका रस न निकलता हो:

5).ऐसे किसान जिनके लाइसेन्स को फसल वर्ष 1998-99 से फसल वर्ष 2020-21 के दौरान रद्द कर दिया गया हो लेकिन उन्होने ने लाइसेन्स के रद्द किए जानेवाले वर्ष को मिलाकर लगातार चार वर्षो तक ऐसी औसत अफीम /मोर्फीन जमा कराई हो जिनमें कुल MQY ( अगले वर्ष की लाइसेंसिंग के लिए निर्धारित) के 100% या इससे अधिक हो।

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अफीम नीति जारी 1998 1999 वाले किसानों को मिलेंगे पट्टे

भाजपा राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष एवं क्षेत्रिय सांसद सुधीर गुप्ता वर्ष 2022-23 की अफीम नीति मं किसान हित के मुद्दों को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के संपर्क में थे। उन्होने किसानों के सुझावों और नीति को लाभकारी बनाने के लिए लगातार जागरूक रहें। जिसके बाद गुरूवार को केन्द्र सरकार द्वारा अफीम नीति घोषित कर दी। अफीम नीति के अनुसार लांसिग पद्धति के अनुसार सभी किसान पात्र होंगे, जिन्होने मार्फिन की औसत उपज 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दी है। इसके साथ ही सीपीएस पद्धति अंतर्गत वर्ष 2021-22 मंे जिन किसानों ने मार्फिन की औसत उपज 3.0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक दी है वे किसान भी पात्र होंगे। वे किसान जिनके अफीम लायसेंस वर्ष 1999-2000 से 2021-22 के बीच घटिया घोषित कर दिए थे उनमें से वे किसान भी पात्र होंगे जिन्होने मार्फिन का अवयव 6 प्रतिशत से अधिक दिए थे। साथ ही वे किसान भी पात्र होगें जिन्होने वर्ष 1998-99 से 2020-21 के दौरान लगातार 4 वर्षो तक ऐसी अफीम / मार्फिन जमा कराई है, जिनमं कुल एम.क्यू. वाय. के 100 प्रतिशत या इससे अधिक है।

एनडीपीएस के आरोप से मुक्त किसान भी पात्र होंगे

इसके अलावा एनडीपीएस के आरोप से मुक्त किसान भी नई नीति के अंतर्गत पात्र होंगे। इसके साथ ही किसान दो भू भूखंडो और लीज की भूमि पर भी अफीम की खेती कर सकेगा। इसके अलावा वे किसान जिनका किसी विशेष गाम में अफीम लायसेंस है लेकिन वे दूसरे ग्राम के निवासी है उन्हें अपने ग्राम में अफीम एकत्रित करने की अनुमति मिलेगी। साथ ही वे किसान भी जिन्होने वर्ष 2021-22 में अपनी संपूर्ण खड़ी फसल की जुताई कर दी थी वे भी किसान अफीम की खेती कर सकेंगे। इसी के साथ ही वे किसान जो वर्ष 2021-22 में अफीम लायसेंस के पात्र थे लेकिन किसी कारण से अफीम लायसेंस प्राप्त नही कर पाए थे वे किसान भी अफीम की खेती कर सकेंगे।

अफीम पट्टा लिस्ट 2022 जिला खंडतहसील
मंदसौर प्रथमदलौदा, मंदसौर
मंदसौरद्वितीय
मंदसौरतृतीय
मंदसौर अफीम के पट्टे की लिस्ट 2022 सभी खंड

अफीम नीति वर्ष 2022-23

नई अफीम नीति आने में अभी समय है, लेकिन अभी से ही तैयारियों का दौर शुरु हो गया है। मार्फिन पात्रता समाप्त करने की मांग जिले के अफीम काश्तकार लंबे समय से उठा रहे है। ऐसे में दिल्ली में अफीम नीति को लेकर हुई बैठक में सांसद सुधीर गुप्ता ने यह मामला उठाया है। अफीम नीति वर्ष 2022-23 को लेकर बैठक भारत सरकार वित्त मंत्रालय राजस्व विभाग के कार्यालय नार्थ ब्लॉक नई दिल्ली में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित हुई। इसमें सांसद सुधीर गुप्ता ने 26 सूत्रीय मांगो का पत्र सौंपा। जिसमें उन्होंने अफीम किसानों को नवीन अफीम नीति में अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने व सरलीकरण पर जोर दिया।

पिछले दो साल से अफीम नीति देरी से जारी हो रही है। ऐसे में इस बार सांसद ने बैठक में अफीम नीति को समय पर जारी करने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। बैठक में संासद गुप्ता ने कहा कि आगामी अफीम फसल वर्ष 2022-23 में लायसेंस पात्रता के लिए 5.9 किलोग्राम हेक्टेयर मॉर्फिन औसत की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। क्योंकि फसल वर्ष 2021-22 में अफीम लायसेंस वितरण प्रक्रिया में देरी होने तथा बेमौसम बारिश और विभिन्न वायरस जनित बीमारियों से अफीम का तय औसत उत्पादन नहीं हो पाया। आगामी नीति में 3.5 किलोग्राम हेक्टेयर मार्फिन के आधार पर लायसेंस प्रदान किए। उन्होंने समय पर अफीम नीति जारी करने और पट्टे वितरित करने पर विशेष जोर दिया। ताकि किसान समय पर अफीम की खेती कर सके। अफीम नीति की घोषणा सितंबर माह के दूसरे सप्ताह तथा लायसेंस वितरण सितंबर माह के अंतिम सप्ताह तक अनिवार्यत किया जाए। मृतक किसानों के नामांतरण उनके उत्तराधिकारी के अलावा मृतक किसान के विधिक वैध वारिसान जैसे दत्तक पुत्र-पुत्री, पौत्र-पौत्री या किसान द्वारा आवदेन पत्र में दर्शाए गए। वारिसान उत्तराधिकारी के नाम पर नामांतरण करके प्रक्रिया को आसान किया जाकर किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जाए। अफीम लायसेंस वितरण प्रक्रिया में नवाचार करते हुए पात्र किसानों को लायसेंस आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की मांग की। सांसद गुप्ता ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट की प्रक्रिया व धाराओं पर पुन विचार के लिए एक कमेटी गठित करने की मांग की। साथ ही डोडाचुरा में उपलब्ध नारकोटिक्स ड्रग नशीले पदार्थ की बहुत ही कम मात्रा के कारण उसे परिधि से बाहर करने की मांग की।

अफीम निति का पेरा जिंसके अनुसार किसान की पात्रता बनती है

Afim patta list 2022 23

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जिन व्यक्तियों को पट्टा नहीं मिलेगा उनकी लिस्ट डाउनलोड करेंगी

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किसानों को किए जाएंगे 10-10 आरी के पट्टे वितरित, सांसद सुधीर गुप्ता ने वित्त राज्य मंत्री को मांग पत्र सौंपा 

Mandsaur की नई अफीम नीति में किसानों के हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। अफीम नीति 2021 के तहत किसानों को 10-10 आरी के पट्टे वितरित किए जाएंगे। साथ ही अफीम किराए में मूल्यवृद्धि भी की जाए ताकि किसानों को राहत मिल सके। उक्त बात सांसद सुधीर गुप्ता ने अफीम नीति वर्ष 2021-22 को लेकर नई दिल्ली में आयोजित बैठक के दौरान कहीं। सांसद सुधीर गुप्ता ने वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को किसानों के हित में 25 सूत्रीय मांग पत्र भी सौंपा। गुरुवार को नई दिल्ली में अफीम नीति वर्ष 2021 को लेकर बैठक आयोजित हुई थी।

अफीम निति का पेरा जिंसके अनुसार किसान की पात्रता बनती है

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किसानों को हो रही समस्या को दूर किया जाए

बैठक में क्षेत्रीय सांसद सुधीर गुप्ता ने वित्त राज्य मंत्री व उपस्थित अधिकारियों के समक्ष कई सुझाव रखे। उन्होंने किसानों को आ रही परेशानियों को लेकर भी अपनी बात रखी। सांसद गुप्ता ने बैठक में कहा कि सर्वप्रथम अफीम पट्टे समय पर वितरित हो जाए। इस वर्ष किसानों का लाइसेंस 30 सितंबर के पहले जारी किया जाए ताकि समय पर फसल लगाई जा सके। समय पर लगी फसल से मार्फिन औसत की गुणवत्ता बढ़ेगी। वर्तमान में वर्ष 2014 से लगातार अफीम लाइसेंस नीति में सुधार हो रहा है पिछली नीति में हजारों किसानों को मार्फिन स्टेन्थ प्रतिशत की बाध्यता हटी है जो 9% से 15% होती थी। ऐसे में पूर्व वर्षों के दौरान जिन किसानों की मशीन 6% से लेकर 5% थी उनके पट्टे बहाल किए जाए। किसानों के खेत पर खड़ी फसल चोरी होने या जंगली पशु नीलगाय के नष्ट करने पर किसान हमेशा अपना लाइसेंस खो रहा है, इस विषय को संज्ञान में लिया जाए।

किसान की मृत्यु के बाद वारिस असमंजस में रहते हैं

कुछ अफीम पट्टे वाले किसानों की मृत्यु हो जाती है जिससे उनके बेटे असमंजस में रहते हैं या विवाद में रहते हैं इस समस्या का स्थाई समाधान किया जाए। अफीम किसानों की अफीम गुणवत्ता का परिणाम लैब से प्राप्त होता है जो नीमच में गाजीपुर में है। गाजीपुर अफीम सैंपल भेजने से लागत भी बढ़ रही है। टेस्टिंग नीमच लैब में हो साथ ही हमारी लंबे समय से मांग है कि टेस्टिंग तोल केंद्रों पर ही फाइनल रिजल्ट के साथ हो आपके आदेश से तोल केंद्रों पर ही यह परिणाम प्राप्त हो और प्रक्रिया इस वर्ष से प्रारंभ हो जाए।

1999 से पहले के भी रूके लायसंस मिल सकते हैं

सांसद सुधीर गुप्ता ने यह भी मांग की है कि वर्ष 1999 से पहले रुके हुए लाइसेंस भी बहाल किया जाए। सांसद सुधीर गुप्ता ने कहा कि अफीम नीति में संशोधन करके हमने 2017-18 के एनडीपीएस एक्ट से दोषमुक्त क्रशर को को लाइसेंस बनाया था उसे वर्ष 2020 की नीति का अंग बनाया जाए। डोडा चूरा को एनडीपीएस एक्ट से बाहर किया जाए क्योंकि इसमें नशीला पदार्थ काफी कम है। साथ ही पूर्व भर्ती प्रक्रिया अनुसार राज्यों के आबकारी विभाग के नियंत्रण में किया जाए। इसी के साथ सांसद गुप्ता ने और भी कई मांगे रखी। बैठक में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, संयुक्त सचिव राजस्व रितिक रंजन पांडे, दिनेश बौद्ध निदेशक नारकोटिक्स, राजेश ढेबरे आयुक्त नारकोटिक्स, अनिल रामटेके सीसीएफ, सांसद सुधीर गुप्ता, सांसद सीपी जोशी, धर्मेंद्र कश्यप, उपेंद्र रावत, दुष्यंत सिंह आदि उपस्थित थे

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने लंबे में इंतजार के बाद बुधवार रात वर्ष 2021-22 के लिए अफीम नीति की घोषणा कर दी। इस बार पांच आरी के पट्टे किसानों को नहीं मिलेंगे। अफीम खेती करने वाले किसान 5.9 और इससे अधिक 12 आरी मार्फिन के आधार पर किसानों को 6, 10, 12 आरी का पट्टा मिलेगा। जिन किसानों ने वर्ष 2019-20 में प्रति हेक्टेयर 4.2 किलो ग्राम औसत मार्फिन दी उन्हें भी इस बार खेती का लाइसेंस मिलेगा। पूर्व में 5.9 औसत मार्फिन देने पर ही खेती का पट्टा जारी किया जाता था।

नई नीति में जिन किसानों ने 2017 से 2020 तक लाइसेंस मिलने के बाद खेती की और हर वर्ष औसत पूरी हो नहीं होने फसल खराब होने पर विभाग की देखरेख में हकाई करवा दी, उन्हें इस बार लाइसेंस की पात्रता नहीं होगी। पिछले वर्ष लाइसेंसशुदा वास्तविक क्षेत्र से 5%, क्षम्य क्षेत्र से अधिक में खेती नहीं कि, 1985 और उसके अंतर्गत बनाए नियमों के तहत उस पर किसी अपराध में कोर्ट से आरोप नहीं हुआ हो, नारकोटिक्स ब्यूरो आयुक्त द्वारा किसानों को जारी विभागीय अनुदेशकों का उल्लंघन नहीं किया हो, ऐसे किसान पट्टे के लिए पात्र होंगे।

अफीम खेती करने वाले किसान को अगले वर्ष 5.9 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर न्यूनतम मार्फिन देना होगा। वर्ष 2018, 2019, 2020 में खेती के कुल क्षेत्र में 50 प्रतिशत से अधिक की फसल हकाई कर दी है, उन्हें वर्ष 2021-22 में अफीम खेती का लाइसेंस नहीं मिलेगा। एनडीपीएस एक्ट के मामलों में कोर्ट द्वारा बरी होने वाले किसान भी खेती कर सकेंगे।

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FAQ’S AFIM NITI 2022 23

अफीम पट्टा लिस्ट 1998 ?

केंद्र सरकार ने 1998 से 2003 के बीच कटे अफीम के पट्टों को बहाल करने का एलान कर दिया है। तत्कालीन समय में तय औसत से 1 किलो ग्राम कम अफीम देने वाले किसानों को पट्टे दिए जाएंगे। ऐसे किसानों को अफीम बोने का अधिकार 2018-19 की अफीम नीति में दिया जाएगा।

अफीम के पट्टे की लिस्ट

अफीम के पट्टे की लिस्ट आप मंदसौर टुडे की पोस्ट में जाकर देख सकते हो https://mandsaurtoday.com/2022/06/27/afeem-niti-2022-2023/

नारकोटिक्स विभाग की ताजा खबर

नारकोटिक्स विभाग की ताजा खबर आप मंदसौर टुडे की पोस्ट में जाकर देख सकते हो https://mandsaurtoday.com/2022/06/27/afeem-niti-2022-2023/

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    1. 1998,1999 में कटे हुए पट्टे जो वापिस मिल रहे हैं उनकी लिस्ट आई क्या

      1. उनकी लिस्ट थोड़े दिन बाद आएगी जैसी आएगी हमारे whatsapp ग्रुप में डाल दी जाएगी

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