मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच और रतलाम तीनों जिलों में अधिक मात्रा में अफीम की खेती की जाती है। इस वर्ष केंद्र सरकार द्वारा अफीम नीति 2021-22 में कुछ बदलाव किए गए थे, जिनसे कुछ किसानों को असंतुष्टि हुई थी क्योंकि सरकार द्वारा कुछ किसानों को सीपीएस पद्धति के तहत भी  अफीम पट्टे दिए गए थे। वर्तमान में जिले में अफीम की खेती अंतीम चरणों में चल रही है। कुछ किसान अफीम के डोडे तोड़कर घर ले आए हैं तो कुछ किसानों के खेतों में ही लगे हुए हैं लेकिन तोते किसानों को परेशान कर रहें हैं।


अफीम समाचार: मध्य प्रदेश के कई जिलों में अफीम की खेती अंतिम चरणों में है , जिसके रखवाली से लेकर अफीम निकालने का कार्य चल रहा है। किसान की इतनी मेहनत के बीच नशे के आदि तोते अफीम के इन दोनों को बड़ी मात्रा में नुकसान पहुंचा रहे हैं। तोते इतने नशेड़ी होते हैं कि अफीम के पौधे से डोडे काटने के साथ-साथ अफीम भी निकाल रहे हैं। सिर्फ यही नहीं तोते नशे में गश खाकर खेत के आस पास गिर भी रहे हैं। किसानों ने अपनी अभंग की फसल को विभिन्न प्रकार की परेशानियों से बचाने के लिए अफीम की फसल पर जाली भी लगा रखी है और अन्य इंतजाम भी कर रखे हैं। इसके बावजूद भी तोतो को जहां से जगह मिल रही है वहां से वहां अफीम के डोडे को खा रहे हैं और किसानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

अफीम के शौकीन तोते डोडो से ही चट कर रहे अफीम

अफीम समाचार: मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में तो किसानों ने अफीम के डोडे निकालना शुरू कर दिया है लेकिन कुछ किसानों को अफीम का लाइसेंस लेट मिलने के कारण उनकी फसल सही प्रकार से पकी नहीं है। इसी कारण अफीम काश्तकार पक्षियों से परेशान हो रहे हैं। अफीम और उससे बने उत्पाद के लत के शिकार सिर्फ जिले के लोग ही नहीं बल्कि पक्षी भी होने लगे हैं। तोते सीधे अफीम के डोडे में से निकल रही अफीम के शौकीन हो गए हैं। पक्षियों के इस शौक से किसानों को काफी खासा नुकसान हो रहा है। अफीम किसानों को पहले मौसम में नुकसान पहुंचाया और अब पक्षी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा आवारा पशु भी अफीम की फसल को नष्ट करने में लगे हुए हैं इसलिए किसानों को पूरी रात जागकर अफीम फसल का ध्यान रखना पड़ रहा है।

अफीम खाने से तोते के नरवस सिस्टम पर असर पड़ता है

अफीम समाचार: किसानों ने जानकारी देते हुए बताया कि तोते अफीम के डोडे सिर्फ खाते ही नहीं है बल्कि उन्हें तोड़कर नीचे गिरा देते हैं और कुछ तोते तो पूरा डोडा ही खा जाते हैं। इसके बाद तोते खेत के पास ही बेसुध होकर गिर जाते हैं और नशा जाने के बाद वहां से उड़ जाते हैं। किसानों के अनुसार अफीम की सीजन खत्म होने के बाद भी तो दे खेत के आस-पास ही पेड़ों पर मंडराते रहते हैं। जब अफीम की सीजन नहीं रहती है और तोतों को अफीम नहीं मिलता है तो वह इसके लिए तड़पते रहते हैं। अफीम के डोडे खाने से तोते के नर्वस सिस्टम पर भी काफी असर पड़ता है।

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