मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच रतलाम जिले में अफीम की तरह लहसुन की खेती भी बड़ी मात्रा में होती है। प्रदेश के कई जिलों में अतिवृष्टि होने के कारण किसानों की फसलें खराब हो जाती है। कई बार अतिवृष्टि के कारण मंदसौर और नीमच जिले के किसानों की फसलें बर्बाद हो गई जिनके मुआवजे का इंतजार अभी भी कई किसान कर रहे हैं। हालांकि जिले के कुछ किसानों को मुआवजा मिला है लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है। 


किसान न्यूज़ मध्य प्रदेश: मध्यप्रदेश के मंदसौर और नीमच जिले में किसानों की लहसुन में थिप्स रोग गया है। थिप्स रोग किसानों की लहसुन की फसल को नष्ट कर रहा है। इससे किसानों के ऊपर संकट छा गया है क्योंकि ना तो पहले बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा मिला है और इस बार रोग के कारण फसल बर्बाद हो रही हैं। जिले के मल्हारगढ़ इलाके में सबसे अधिक किसानों की लहसुन की फसल में रोग आ गया है। मल्हारगढ़ ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि ” घर चलो घर घर चलो महा अभियान ” और जनसंवाद कार्यक्रम में कई समस्याएं गरीब किसान, मजदूर द्वारा बताई जा रही है। किसान लहसुन की फसल को लेकर चिंतित है।

महंगी दवाइयों का छिड़काव कर रहे, नहीं दिख रहा असर

किसान न्यूज़ मध्यप्रदेश: किसान ने खेत में लहसुन बोने के लिए महंगाई के भाव में लहसुन खरीदी। इसके बाद जब लहसुन की फसल में रोग आ गया तो किसानों ने महंगी दवाइयां लाकर उनका छिड़काव किया। थिप्स रोग लगने के कारण लहसुन की फसल नष्ट हो गई और महंगी दवाई छिड़कने का भी कोई असर फसल पर नहीं पड़ा। इस प्रकार किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। मल्हारगढ़ तहसील में कांग्रेस नेताओं ने किसानों के खेतों में पहुंचकर लहसुन का निरीक्षण भी किया है। रोग के कारण हुए नुकसान के लिए शासन प्रशासन से मुआवजे की मांग की गई है। किसानों को मंडियों में भी लहसुन के दाम सही नहीं मिल पा रहे हैं। किसानों को लहसुन की कीमत 1000 से लेकर ₹3000 क्विंटल तक ही मिल रही है जिससे उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है।

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