अफीम न्यूज: मध्यप्रदेश के मंदसौर नीमच रतलाम जिले में अफीम किसानों को इस वर्ष की अफीम नीति के तहत दो पद्धतियों में खेती करने के लिए लाइसेंस दिए गए थे जिसमें पहली पद्धति में प्रतिवर्ष दिए जाने वाले लाइसेंस और दूसरी पद्धति में सीपीएस पद्धति के तहत किसानों को अफीम के लिए लाइसेंस दिए गए थे। यह सीपी एस पद्धति भारत सरकार ने विदेशों से लाकर अफीम किसानों को लाइसेंस दिए थे। सीपीएस पद्धति के तहत लाइसेंस प्राप्त करने वाले किसान नाराज है और अफीम नष्टीकरण के लिए आवेदन कर रहे हैं।



अफीम न्यूज: मध्यप्रदेश के मंदसौर रतलाम और नीमच जिले में काले सोने की खेती में सीपीएस पद्धति ने किसानों को उलझा दिया है। सीपीएस पद्धति से परेशान अफीम किसानों ने लगातार अफीम नष्टीकरण के लिए आवेदन करना शुरू कर दिए हैं। केंद्र सरकार ने सीपीएस पद्धति वाले किसानों के लिए सर्कुलर तो जारी कर दिया है लेकिन इसमें भी किसानों को उलझाया जा रहा है क्योंकि इस अफीम नीति में अफीम के डोडे काटने से लेकर जमा कराने तक की बात कही गई है लेकिन अभी तक अफीम की कीमत तय नहीं की गई है। इस अफीम नीति से किसानों में नाराजगी है। सीपीएस पद्धति से अफीम किसानों को लाइसेंस देरी से दिए गए थे जिसके कारण फसल छोटी रह गई है और सही प्रकार से तैयार नहीं हो पाई है। इस कारण सीपीएस पद्धति से प्राप्त लाइसेंस वाले किसानों ने अफीम नष्टीकरण के लिए आवेदन कर दिए हैं। अब तक तीनों खंडों में किसानों ने 520 किसानों ने अफीम खेती नष्ट करने के लिए आवेदन कर दिया है।

सीपीएस पद्धति वाले किसानों के लिए नया सर्कुलर क्या आया है

अफीम न्यूज: केंद्र सरकार ने सीपीएस पद्धति से लाइसेंस प्राप्त करने वाले किसानों के लिए नई अफीम नीति जारी तो कर दी है लेकिन उसमें किसानों को दाम देने के लिए कोई जिक्र नहीं किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई अफीम नीति में कुछ बिंदुओं पर बिल्कुल भी जानकारी नहीं दी गई है। केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई जीपीएस पद्धति वाले किसानों के लिए अफीम नीति में किसानों को ढूंढे पर चीरा लगाने के लिए अधिकार तो नहीं होगा लेकिन विभाग के कर्मचारी और मुखिया की मौजूदगी में अफीम के डोडे को 8 इंच यानी तने तक काटा जाएगा। इससे पहले विभाग की टीम खेत में पहुंचकर अफीम की फसल को देखेगी कि किसान ने अफीम के डोडे पर चीरा तो नहीं लगा रखा है। इसके बाद डोडे को बिना नुकसान पहुंचाए उसमें छेद करके गाने को बाहर निकाला जाएगा और अफीम की तरह डोडे को पैक करके नारकोटिक्स विभाग को भेजे जाएंगे। इसमें यह नहीं बताया गया है कि किसानों को अफीम का दाम कितना मिलेगा। 

अफीम किसान अफीम नष्टीकरण के लिए आवेदन क्यों कर रहे हैं

सीपीएस पद्धति क्या है: सीपीएस पद्धति द्वारा अफीम किसानों को वर्ष 2021 में अफीम नीति के तहत नवंबर महीने में लाइसेंस जारी किए गए थे। नवंबर तक सामान्य अफीम नीति से लाइसेंस प्राप्त करने वाले किसानों ने अफीम की बोवनी कर दी थी। इस कारण सीपीएस पद्धति से लाइसेंस प्राप्त करने वाले किसानों ने दिसंबर 2021 में अफीम की बोवनी की। अब वर्तमान में सामान्य अफीम नीति से लाइसेंस प्राप्त करने वाले किसानों की अफीम की फसल तो तैयार हो चुकी है लेकिन सीपीएस पद्धति से लाइसेंस प्राप्त करने वाले किसानों की अफीम की फसल छोटी ही रह गई है। फसल छोटी रह जाने के कारण किसानों ने अफीम की फसल को नष्ट करने के लिए आवेदन देना शुरू कर दिए हैं। अफीम किसान अपनी फसल को नष्ट करने के लिए 15 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। वर्तमान में विभाग को तीनों खंडों से मिलाकर लगभग 600 किसानों के आवेदन मिल चुके हैं।

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