रातों-रात दफना दिए सैकड़ों गायों के शव 2022

मध्यप्रदेश के बसेरिया की बसई गांव की गौशाला से एक दिल दहलाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। बसई गांव की गौ सेवा भारती गौशाला में कम नहीं बल्कि एक साथ 850 गौ माताओं की मौत हुई है जिन्हें गौशाला कमेटी ने रातों-रात दफना दिया और नमक और केमिकल डाल दिया। इस रिपोर्ट का दावा रातोंरात जेसीबी से 9 फीट गहरा गड्ढा खोदने वाली जेसीबी ड्राइवर शाहरुख द्वारा किया गया है। शाहरुख नगरपालिका बैसरिया का जेसीबी ड्राइवर है। मामले का खुलासा होने के बाद जब जेसीबी ड्राइवर शाहरुख से जानकारी ली गई तो शाहरुख ने जानकारी देते हुए बताया कि बसई गांव की धर्मशाला में बड़ी संख्या में गोवंशो की मौत हो गई थी। शाहरुख ने जानकारी देते हुए बताया कि शाम करीब 4:00 बजे से बेसरिया कचरा खंती में 9 फीट गहरा गड्ढा खोदने का कार्य शुरू हुआ था।.

गाड़ियों में भर-भर कर गोवंशो के शव लाए जा रहे थे

जेसीबी ड्राइवर शाहरुख ने जानकारी देते हुए बताया कि उधर कचरा खंती में गड्ढा खोदा जा रहा था और इधर गाड़ियां भर भर कर गायों के शव आ रहे थे। जेसीबी ड्राइवर शाहरुख ने बताया कि लगभग 900 से अधिक गायों के कंकाल गाड़ियों में भरकर लाए गए और 9 फीट गहरे गड्ढे में दफनाया गए। रातों-रात यह कार्य पूरा कर दिया गया और लगभग 1:00 तक गायों को दफनाने का काम हुआ। एक साथ इतने शव गड्ढे में दफनाने के बाद उनकी दुर्गंध आसपास नहीं फैले इसके लिए गड्ढे में नमक और केमिकल भी डाला गया था। बताया जा रहा है कि यह कार्य रविवार की रात को किया गया है और रविवार की रात से यह गायों के शव वहीं पर गड़े हुए हैं। रातों-रात दफनाए जाने वाले इस सच को भास्कर के रिपोर्टर नीलेंद्र पटेल सामने लाए हैं।

पुलिस ने गौशाला संचालिका पर केस दर्ज किया, SDM कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपेंगे

पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि भाजपा नेत्री निर्मला शांडिल्य की गौशाला में रविवार की सुबह गौशाला के कुएं में 20 गायों के शव और गौशाला मैदान परिसर में 80 से अधिक गायों के शव पड़े मिले थे। इसके बाद गौशाला के लोगों ने रातों-रात इस सच को दफना दिया लेकिन मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने गौशाला संचालिका निर्मला पर केस दर्ज किया है। इसके बाद गौशाला का संचालन प्रशासन ने अपने हाथ में ले लिया है।  बताया गया है कि निर्मला पिछले 20 सालों से गौशाला को संचालित कर रही है। इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आने वाले 2 दिनों में एसडीएम कलेक्टर को रिपोर्ट सौंप देंगे। गायों के मरने का मामला अभी यहीं नहीं थमा बल्कि सोमवार को भी सुबह से लेकर शाम तक ट्रैक्टर से गायों के शव ले जाए जा रहे थे। सोमवार को सभी गायों की मौत प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के हमले के सामने हुई। गायों को तड़पता देख वहां पहुंचे चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो पाए। 

मरने वाली अधिकतर गांयो में 5 से 7 साल की अधिक 

जानकारी में यह भी बताया गया है कि जितनी भी गायों की मौत हुई है उनमें से 5 से 7 साल की अधिक है। गौशाला में मरी हुई गायों केशव गोशाला से कुछ ही दूर सड़क किनारे फेंक दिए गए जिस दिन भर कुत्ते नोच रहे लेकिन नगरपालिका ने भी गायों के शवों को नहीं उठाया। नगरपालिका का ट्रैक्टर गौशाला में आया और वहां पर पड़े गायों के शव को ट्रैक्टर में भरकर ले गया लेकिन रास्ते में पड़े गायों के शव को नगरपालिका के कर्मचारियों ने नहीं उठाया जबकि ट्रैक्टर उसी रास्ते से गया था। प्रशासन ने गोशाला संचालन अपने हाथों में लिया और भूख प्यास से तड़प रही गायों के लिए खाने पीने की व्यवस्था की। गायों को ठंड से बचाने के लिए गौशाला के चारों तरफ पर्दे लगाए गए और ज्यादा गंभीर गायों को बोरे से ढका गया। घटना होने के बाद इस पर तेजी से राजनीति शुरू हो गई दिनभर गौशाला में राजनीतिक दलों के अधिकारियों का आना-जाना लगा रहा। कांग्रेसियों ने तो गायों को श्रद्धांजलि भी दी। बताया गया है कि निर्मला को गौशाला खोलने के लिए दिग्विजय की सरकार में जमीन दी गई थी। फिलहाल पुलिस ने निर्मला को गिरफ्तार कर लिया है।

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