मध्यप्रदेश न्यूज़: काले सोने अफीम पर छाई सफेद फूलों की बौछार, किसानों ने शुभ मुहूर्त देख पूजा कर डोडो में लगाया पहला चीरा 

मध्यप्रदेश न्यूज़:  के मंदसौर जिला में अफीम किसानों के खेतों में इस समय सफेद फूलों की बौछार छाई हुई है। मध्यप्रदेश के मंदसौर,नीमच और रतलाम जिलों में अफीम किसानों के खेतों में सफेद फूलों के साथ-साथ फसल पर डोडे लगना भी शुरू हो चुके हैं। प्रदेश के मंदसौर जिले में अधिकतर किसानों के सफेद फूल डोडे में परिवर्तित होने लगे हैं। मंदसौर जिले के अफीम किसानों ने अपनी फसल में लुआई-चिराई का कार्य भी शुरू कर दिया है। कई इलाकों में अभी अफीम किसानों ने अफीम की फसल में लुआई चिराई का कार्य शुरू नहीं किया है। जिन किसानों को विभाग ने पहली पद्धति के दौरान अफीम लाइसेंस दिया था उन किसानों ने अपनी फसल में लुआई चिराई का कार्य शुरू कर दिया है।

सीपीएस पद्धति से लाइसेंस प्राप्त करने वाले किसान चीरा लगाने का कर रहे हैं इंतजार

मध्य प्रदेश न्यूज़: कुछ किसानों को नारकोटिक्स विभाग ने सीपीएस पद्धति के तहत कुछ दिनों बाद अफीम के लाइसेंस दिए थे। इस कारण सीपीएस पद्धति से पट्टा प्राप्त करने वाले किसान अभी फसल में लुआई चिराई का काम शुरू नहीं कर पाए हैं। आने वाले एक सप्ताह के अंदर सभी अफीम किसान अपनी अफीम की फसल में लुआई चिराई का कार्य शुरू कर देंगे। मंदसौर जिले में जिन जिन अफीम किसानों के खेतों में अफीम की फसल परिपक्व हो गई है, उन किसानों ने लुआई चिराई का कार्य शुरू कर दिया है। मंदसौर जिले में सभी अफीम किसानों ने शुभ मुहूर्त देख फसल और मां कालका की पूजा अर्चना करने के बाद डोडे पर पहला चिरा लगाया। 

मां कालका की पूजा करने से अफीम अच्छी निकलती है

अफीम समाचार: मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के अफीम किसानों की मान्यता है कि मां कालका की पूजा अर्चना करने के बाद अफीम की शुरुआत करने से अफीम अच्छी निकलती है। चित्तौड़गढ़ में स्थित मां कालका मंदिर अफीम किसानों और तस्करों के लिए ही विख्यात है। सिर्फ अफीम किसान ही नहीं बल्कि अफीम तस्कर भी यह मानते हैं कि मां कालका उनकी सहायता करती है और तस्करी करने में सफल बनाती है। अफीम जिले की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती हैं, जिसे काले सोने के नाम से भी जाना जाता है। मंदसौर जिले में तीन खंडों में अफीम उत्पादन किसान है। प्रति वर्ष नारकोटिक्स विभाग जिले में अफीम किसानों को लाइसेंस जारी करता है। मंदसौर जिले के तीनों खंडों में मिलाकर 13780 किसानों के पास अफीम के पट्टे हैं। इनमें प्रथम खंड में 4412 अफीम पट्टा धारी किसान है। दूसरे खंड में 4712 किसान और तीसरे खंड में 3451 किसान है।

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