अवारा मवेशियों के कारण शहर में बड़े हादसे होने की संभावना 2022

प्रदेश सरकार पशुओं की सुरक्षा के लिए योजनाएं चाहे कितनी भी चला रही हो लेकिन उन योजनाओं पर कार्य सही तरीके से नहीं किया जा रहा है। बहुत बात प्रयास करने के बाद भी शहर में मुख्य चौराहों और मुख्य सड़कों पर पशुओं का जमघट जैसा का तैसा ही बना हुआ है और आज भी राहगीर और वाहन चालकों को हादसे का डर बना हुआ है। सड़कों पर पशु बैठने के कारण वाहन चालको को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसको लेकर कलेक्टर गौतम सिंह ने ली थी और उसमें निर्णय लिया गया था कि अब पशुओं को सड़क पर छोड़ने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर कई संगठनों द्वारा बार-बार आंदोलन भी किए गए हैं लेकिन जिम्मेदार इसके बाद भी मामले की तरफ ध्यान नहीं दे रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में प्रक्रिया चल रही है और अब पशुओं को सड़क पर छोड़ने वालों पर कठोर कार्यवाही की जाएगी।

बैठक में बड़े निर्णय लेकिन असलियत में उनका कोई असर नहीं

मंदसौर शहर यातायात को सुधारने के लिए प्रशासन द्वारा बैठक में बड़े-बड़े निर्णय लिए जाते हैं लेकिन असलियत में उनका असर नहीं दिख रहा है। सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में अधिकारियों द्वारा सड़क पर घूम रहे आवारा मवेशियों के विषय में चर्चा की गई थी। इस पर कलेक्टर ने निर्णय लेकर अधिकारियों को कहा था कि शहर में अवारा मवेशियों के अलावा सड़क पर खड़े करके चारा खिलाने वाले को रोका जाए और उन पर कठोर कार्रवाई की जाए। लेकिन इसके बाद भी चौराहों पर एक और मुख्य सड़कों पर पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। कभी कभी बहुत सारे पशु एक ही जगह जमावड़ा लगाकर बैठ जाते हैं जिससे मुख्य चौराहों पर भी जाम लग जाता है। इसके बाद भी मामले में जवाब दार उदासिन रवैया अपना रहे हैं।

बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं जवाबदार

सड़क पर घूम रहे आवारा मवेशियों के कारण आए दिन सड़क हादसे होते रहते हैं। शहर में कई बार आवारा मवेशियों के कारण हुए हादसों में लोग घायल हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद भी प्रशासन का इस ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं है। जब मीडिया वालों द्वारा खबर को प्रकाशित किया गया तो अधिकारियों ने अभियान चलाने की घोषणा की थी लेकिन वह सिर्फ कागजों में ही लागू रह गई और उसका कोई परिणाम सामने नहीं आया। शहर के मुख्य गांधी चौराहे पर प्रतिदिन आवारा मवेशियों का झुंड देखने को मिल जाता है, जो दिन भर सड़क पर बैठे रहते हैं और इससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। चौराहों पर अधिक यातायात होने के कारण वाहन चालक के साथ-साथ राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसको देखकर ऐसा लग रहा है कि जवाबदार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं और मामले में उदासीनता बता रहे हैं। 

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