मंदसौर में देह व्यापार छोड़ लड़कियां चलाएंगी रिक्शा 2022

मंदसौर में अब प्रशासन द्वारा पिछड़े समाज की लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई पहल की शुरुआत की है। मंदसौर प्रशासन ने पिछड़े समाज की लड़कियों को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास शुरू किया है। मुंबई में मौजूद थ्री चैलेंज एनजीओ के साथ मिलकर प्रशासन अब मंदसौर शहर की बांछड़ा समुदाय की 10 लड़कियों को ई- रिक्शा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है। प्रशासन ने सभी लड़कियों को ट्रेनिंग देना और ट्राफिक नियम बताना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने कहा है कि पिछड़ी समाज की लड़कियों को ई रिक्शा सिखा कर परंपरागत चली आ रही देह व्यापार की प्रथा से निकलकर इन्हें मुख्यधारा से जोड़ना ही इनका मकसद है। सभी महिलाओं को पुलिस की टीम के साथ मंदसौर मुख्य मार्ग पर ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया है। कुछ लड़कियों को ट्रेनिंग देने के साथ-साथ लर्निंग लाइसेंस भी उपलब्ध करा दिया गया है। 

कुछ लड़कियों को पुलिस भर्ती की भी तैयारी कराई जा रही है

प्रशासन पिछड़ा समाज की लड़कियों को सिर्फ ई रिक्शा से ही नहीं बल्कि कई प्रयासों से आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश कर रहा है। ई रिक्शा चलाने की ट्रेनिंग देने के साथ-साथ कुछ लड़कियों को पुलिस भर्ती के लिए भी तैयारी कराई जा रही है। प्रशासन ने शहर में कुछ रास्ते चयन भी कर लिए हैं जहां पर इन लड़कियों को परमिट देकर रिक्शा चलाने के लिए मंजूरी दी जाएगी। प्रशासन ने बताया है कि जिन लड़कियों को ट्रेनिंग दी जा रही है वह कलेक्ट्रेट और नेशनल हाईवे को शहर से जोड़ने वाले रास्तों पर रिक्शा चलाएंगी। प्रशासन का यह प्रयास फिलहाल तो सफल दिख रहा है। कुछ दिनों तक व्यवस्था को देखते हुए अगर मामला सही रहा तो आने वाले दिनों में और भी लड़कियों को ई-रिक्शा सिखाया जाएगा।

एक ई रिक्शा की कीमत 1.88 लाख रुपए है

प्रशासन को यह रिक्शा थ्री चैलेंज एनजीओ बोम्बे उपलब्ध करवा रहा है। सभी ई रिक्शा एनजीओ की तरफ से दिए गए हैं।  आज से ही 3 ई रिक्शा देकर इसकी शुरुआत की गई है। बताया जा रहा है कि एक ई रिक्शा की कीमत 1.88 लाख रुपए है। एनजीओ ने सिर्फ मंदसौर ही नहीं बल्कि मुंबई में भी देह व्यापार के आधार पर अपना जीवन बिता रही लड़कियों का जीवन सुधारने में बहुत काम किया है। फिलहाल मंदसौर में 10 लड़कियों को ई रिक्शा दिया जा रहा है उसके बाद इनकी संख्या बढ़ा दी जाएगी। एनजीओ ने प्रशासन से बात कर बांछड़ा समुदाय की लड़कियों के लिए कार्य करने की इच्छा जताई और इसी के तहत यह कार्य किया जा रहा है। एनजीओ ने जिले में मौजूद अध्यापन वाले गांव में से 10 लड़कियों को चयनित किया है और उन्हें रिक्शा चलाने को दिया है। 

कहां कहां से किया गया 10 लड़कियों का चयन

एनजीओ ने पूरे मंदसौर जिले से 10 लोगों को चयनित किया है। इसमें से पानापुर की तीन,  बोतलगंज, बेटीखेडी, खेजड़ी, खजुरी चंद्रावत, डोडिया मीणा और खांखरीखेडी की लड़कियों शामिल है। कलेक्टर गौतम सिंह के निर्देश पर आरटीओ ने पुलिस लाइन में चिन्हित महिलाओं को प्रशिक्षण दिया और रिक्शा चलाना सिखाया। पिछले 10 दिनों से लड़कियों को ट्रेफिक नियमों से लेकर सभी चीजें सिखाई जा रही है। इन लड़कियों को आरटीओ के माध्यम से पहले ही लर्निंग लाइसेंस उपलब्ध करा दिए गए हैं। आज से लड़कियों को ई रिक्शा सौंप दिए गए हैं और आज से सड़कों पर रिक्शा चलाने लग जाएंगी। कलेक्टर गौतम सिंह ने कहा है कि बांछड़ा समुदाय की लड़कियों को रोजगार से जोड़कर मुख्यधारा में लाने का यह पायलट प्रोजेक्ट है।

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