मंदसौर मंडी में किसानों को रुला रहे प्याज, जितनी किमत मिल रही उतने में तो बुआई और मंडी तक लाने का खर्च भी नहीं निकल रहा

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कृषि उपज मंडी में प्याज कम दाम पर बिकने से किसान हो रहे नाराज 2022

मंदसौर जिले में प्याज वाले किसानों को कृषि उपज मंडी में उनका भाव रुला रहा है। इतनी मेहनत करने के बाद भी किसानों को प्याज के सही दाम नहीं मिल रहे हैं। इससे किसानों में नाराजगी है। किसानों ने अपने प्याज को बीमारियों से बचाने के लिए काफी पैसा खर्च कर दिया लेकिन किसानों को उसके हिसाब से प्याज के दाम नहीं मिल रहे हैं। कुछ किसानों ने बड़ी मेहनत के बाद प्याज का उत्पादन किया और मंदसौर कृषि उपज मंडी लेकर पहुंचे। कुछ दिनों पहले दिन मौसम हुई बरसात ने खुले में पड़े किसानों के प्याज को भिगा दिया। इसके बाद 2 दिनों तक मंडी बंद रह गई जिससे किसानों के खुले में पड़े प्याज खराब हो गए और कुछ किसानों के प्याज दोबारा अंकुरित होने लगे। इस कारण किसानों को प्याज के दाम बहुत कम मिले और किसानों को इससे नाराजगी हुई।

किसानों का कहना है कि: प्याज की लागत भी नहीं मिल पा रही है

खराब प्याज की बात छोड़ो कृषि उपज मंडी मंदसौर में अच्छे प्याज के दाम भी सही नहीं मिल पा रही है। किसान कितना भी अच्छी क्वालिटी का माल लेकर आता है लेकिन 2100 रुपए प्रति क्विंटल से ज्यादा कोई भी व्यापारी प्याज नहीं खरीद रहा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने प्याज को उगाने में जितना खर्चा किया है, वह लागत भी नहीं मिल पा रही है। इस वर्ष प्याज में जलेबी रोग की बीमारी आ गई थी जिससे किसानों को महंगी महंगी दवाइयों का छिड़काव करना पड़ा था। लेकिन इसके बाद भी किसानों को नुकसान ही झेलना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि उनके खर्चे की भरपाई करने के लिए प्याज के दाम कम से कम ₹3000 प्रति क्विंटल बिकने चाहिए। अगर इससे कम कीमत में किसान का प्याज दिख रहा है तो किसान को नुकसान हो रहा है। इतनी किमत में तो किसानों का बुवाई से लेकर मंडी तक का खर्चा ही नहीं निकल पा रहा है।

अच्छा दाम पर नहीं बिकने से किसान प्याज मंडी में छोड़कर जा रहे

मंगलवार को भी कृषि उपज मंडी मंदसौर में प्याज ₹650 प्रति क्विंटल से लेकर ₹2000 प्रति क्विंटल तक बिके लेकिन किसानों का कहना है कि इस कीमत से उन्हें नुकसान हो रहा है। कई किसान तो प्याज के दामों से इतने नाराज है कि वह अपने प्याज के ढेर को मंदसौर मंडी में ही छोड़कर जा रहे हैं। इसके बाद लोग प्याज को उठा कर ले जा रहे हैं। पहले ही किसानों को प्याज के दाम कम मिल रहे हैं और उसके बाद गोदाम तक प्याज के कट्टे ले जाने का खर्चा भी किसान को ही उठाना पड़ रहा है। किसान और नुकसान नहीं करना चाहते हैं इसलिए अपने प्याज के ढेरों को छोड़कर जा रहे हैं।

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