लहसुन और प्याज की आवक अधिक होने से छोटा पड़ गया शामगढ़ मंडी परिसर 2021

इन दिनों शामगढ़ कृषि उपज मंडी में प्याज और लहसुन की बंपर आवक हो रही है। मंगलवार को मंडी में इतनी आवक हुई कि किसानों को जगह ही नहीं मिली और शामगढ़ मंडी परिसर छोटा पड़ गया। शामगढ़ कृषि उपज मंडी में अव्यवस्था होने के कारण किसानों और व्यापारियों को परेशान होना पड़ रहा है। अधिक आवक होने के कारण मंडी प्रशासन ने व्यापारियों से चर्चा करते हुए यह निर्णय लिया है कि अब शामगढ मंडी में प्याज लेकर आने वाले किसानों को मंडी के पीछे वाले गेट से प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे तक प्रवेश दिया जाएगा। शामगढ़ मंडी सचिव प्रवीण चौहान जानकारी देते हुए बताया कि कृषि उपज मंडी शामगढ़ में प्याज लेकर आने वाले किसानों को मंडी के पीछे वाले गेट से सुबह 6:00 बजे तक प्रवेश दिया जाएगा।

सुबह 6:00 बजे बाद प्याज लेकर आने वाले किसानों को मंडी में प्रवेश नहीं मिलेगा

शामगढ़ कृषि उपज मंडी में मंडी प्रशासन द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि प्याज लेकर आने वाले किसानों को मंडी में 6 बजे तक प्रवेश दिया जाएगा और उसके बाद प्याज वाले किसानों को मंडी में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।  मंडी में लहसुन और प्याज की बंपर आवक हो रही है और अन्य जिसो की आवक भी होने के कारण मंडी प्रशासन छोटा पड़ रहा है। इस कारण मंडी में अव्यवस्था फैल रहीं हैं। सोमवार को भी शामगढ़ मंडी में 5000 से अधिक कट्टों की आवक हुई। इसके अलावा मंडी में सोयाबीन और लहसुन के अलावा अन्य उपज भी आ रही है जिसके कारण प्रांगण छोटा पड़ रहा है। प्रमुख व्यवसाई राम लाल सेठिया कलेक्टर से मांग की है कि जल्द से जल्द शामगढ़ में नई मंडी के लिए कदम उठाए जाएं ताकि किसानों और व्यापारियों को हो रही परेशानियों से छुटकारा मिल सके।

लहसुन में आग लगाने से सामने आई किसानों की परेशानी

मंदसौर कृषि उपज मंडी में कुछ दिनों पहले उज्जैन से लहसुन लेकर आए किसान को कम दाम मिलने पर उसने अपनी ही लहसुन में आग लगा दी थी। लहसुन की फसल पूरे देश में प्रसिद्ध है क्योंकि यहां उसके लायक परिस्थितियां मिल जाती है और जिले के किसान उत्साहित होकर लहसुन की खेती करते हैं। इस घटना के बाद किसानों की परेशानियां सबके सामने आई है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष नव कृष्ण पाटिल ने बताया कि मंदसौर में एक किसान ने लहसुन में आग लगा दी थी क्योंकि उसे लागत से भी कम दाम मिल रहे थे। फसलों की दवाइयों की कीमतें इतनी बढ़ गई है लेकिन मजबूरी में किसानों को यह लानी पड़ रही है। इसके बावजूद भी किसानों को फसलों के अच्छे दाम नहीं मिलते हैं और वह लागत जितना पैसा भी नहीं कमा पा रहे हैं। इस समस्या से सभी अन्नदाता काफी परेशान है। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *