मंदसौर: घरों से भागने वाले लड़कों और लड़कियों को रेलवे स्टेशन पर मिलेगी मदद, मंदसौर में शुरू हुई मुहिम

 

घर से भागे बच्चों को मंदसौर रेलवे स्टेशन पर मिलेगी मदद 2021

मंदसौर जिले में घर से भागे हुए बच्चों को पकड़ने के लिए वही दूर रहा है रेलवे प्रशासन द्वारा एक अजीब मुहिम चलाई गई है। जो बच्चे घर से भागकर रेलगाड़ी में सफर कर रहे होते हैं या तस्करी कर ले जा रहे बच्चों को पहचान कर यात्री चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दे सके इसलिए मंदसौर रेलवे स्टेशन पर एक मुहिम चलाई गई है। मंदसौर के सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग के बाद सांसद सुधीर गुप्ता ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है। सांसद सुधीर गुप्ता ने रेल मंत्री को पत्र लिखते हुए कहा है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रदेश के रेल्वे स्टेशन पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर होने चाहिए और जल्दी ही इसकी शुरुआत भी करनी चाहिए। 

बाल तस्करी रोकने में मददगार होगी यह पहल

सांसद सुधीर गुप्ता ने पत्र लिखने के साथ साथ यह भी जानकारी दी है कि यह पहल चालू होने के बाद बाल तस्करी रूक जाएगी। सभी स्टेशनों पर अनाउंसमेंट के साथ यह योजना बाल तस्करी को रोकने में भी काफी मददगार साबित होगी। प्रदेश के रेल्वे स्टेशनों पर अनाउंसमेंट की शुरुआत कराने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता रानू भावसार ने सांसद सुधीर गुप्ता से इसकी मांग की थी। इसके बाद सांसद सुधीर गुप्ता ने बात को आगे बढ़ाते हुए रेल मंत्री को पत्र लिखा। दरअसल शिवपुरी जिले में पदस्थ बाल संरक्षण अधिकारी राघवेन्द्र शर्मा ने स्थानीय रेल्वे के अधिकारियों के समन्वय से रेल्वे स्टेशन पर एक अनाउंसमेंट की शुरुआत की गई है। इस प्रयोग को बाल तस्करी की रोकथाम के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तस्करी करने वाले आरोपी रेलगाड़ी का अधिक उपयोग करते हैं

बाल विवाह, बाल श्रम और वेश्यावृत्ति जैसे अपराधों को धकेलने के लिए बच्चों को दूसरे राज्यों में ले जाने के लिए सभी आरोपी अधिकतर रेलगाड़ी का ही प्रयोग करते हैं। इसके अलावा घर से भागने वाले अधिकतर लड़कियां और लड़के रेलगाड़ी का ही उपयोग करते हैं। इसी की रोकथाम के लिए यह पहल चलाई जा रही है ताकि सहयात्री चाइल्ड लाइन को सूचित कर बच्चों का भविष्य मुसीबतों में जाने से रोक सकते हैं। कई बार यात्रियों को रेल मे ऐसे बच्चे भी मिलते हैं जो मुसीबत में होते हैं और यात्री उनकी मदद करना चाहते हैं लेकिन इसके लिए किसी भी प्रकार के नंबर या अन्य तरीका नहीं होने के कारण बच्चों को मदद नहीं मिल पाती हैं। ऐसे में स्टेशनों पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर होना बहुत आवश्यक है। 

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