पहले तो कोरोना ने बेहाल किया, अब 65 हजार किसानों को दी दो साल के लिए सिंचाई की टेंशन

 

शामगढ़ सुवासरा सुक्ष्म सिंचाई परियोजना

कोरोना महामारी में कई किसानों के घर उजड़ गए। देश व प्रदेश में कोरोना ने कई गरीब परिवारों की जीवन जीने की लाइन डगमगा दी। इसके बाद एक परियोजना ने 65000 किसानों की सिंचाई की चिंता बढ़ा दी। जिले के करीब 65000 से अधिक किसानों को अपने खेतों में सिंचाई के लिए चिंता में डाल दिया है। प्रदेश में सरकार ने शामगढ़ सुवासरा सुक्ष्म सिंचाई परियोजना चलाई थी। सरकार द्वारा चलाई गई इस योजना को दिसंबर 2021 में पूरा होना था लेकिन अब भी यह योजना अधूरी ही पड़ी है।

योजना का मुख्य लक्ष्य क्या था

शामगढ़ सुवासरा सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के तहत सभी किसानों को सिंचाई के लिए चंबल का पानी मिलता। यह योजना अभी तक पूरी हो जाती लेकिन कोरोना महामारी के कारण कार्य रुक गया और अब किसानों को 2 साल और इंतजार करना पड़ेगा। हालांकि विभाग ने दावा किया है कि 2000 23 दिसंबर तक योजना को पूरा कर दिया जाएगा और किसानों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। विधानसभा चुनाव के दौरान योजना पूरी कर दी जाएगी। जानकारी के अनुसार शामगढ़ सुवासरा परियोजना में गरोठ तहसील शामगढ़ तहसील और सुवासरा तहसील के 226 गांव सम्मिलित किए गए हैं।

इस योजना में 1662 करोड़ रुपए की लागत आएगी

इस योजना में 1662 करोड रुपए की लागत आएगी। इस योजना से इन गांवों के करीब 65000 से अधिक किसानों को 85 हजार हेक्टेयर से अधिक जमीन की सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इस योजना का कार्य 2 अगस्त 2018 को कार्य शुरू हो गया था। इसे एक अगस्त 2021 को पूरा होना था लेकिन अभी तक इसका कार्य आधा ही हो पाया है। विभाग ने कहा है कि यह योजना दिसंबर 2023 में पूरी हो जाएगी। जिले में पिछले 2 सालों से कम बारिश होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। रबी की फसल को लेकर किसान तनाव में है। ऐसे में यह योजना उन किसानों के लिए वरदान साबित होगी।दो साल देरी होने से अब उन किसानों को सिंचाई के लिए परेशान होना पड़ेगा। परियोजना पूरा होने के बाद किसानों को काफी फायदा मिलेगा और सिंचाई के लिए चिंता खत्म हो जाएगी।

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