Afeem news 2021- 22

वर्ष 1997 के बाद से सरकार किसी को भी अफीम का पट्टा नहीं दे रही है बस हर वर्ष पट्टे काट ही रहें हैं। ऐसा लग रहा है कि धीरे धीरे अफीम की खेती सिमटती जा रही है। आज से लगभग 10 साल पहले मंदसौर जिले के लगभग हर किसान के पास अफीम का पट्टा था और कुछ किसान तो ऐसे थे जिनके पास दो दो पट्टे थे लेकिन अभी की स्थिति देखी जाए तो जिले के सभी गांवों में सिर्फ कुछ लोगों पर ही   अफीम के पट्टे बचें है और वह भी खतरे में चल रहे हैं। किसान अब चिंता में आ गए हैं कि इस वर्ष भी पट्टे मिलेंगे या नहीं। जावद क्षेत्र में अधिकतर किसान सहकारी जमीन पर खेती करते हैं इसलिए उनको योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।

जावद के किसानों को पट्टे देने पर सरकार ने लगा रखी है रोक

जावद में कई गांवों के किसान ऐसे हैं जो वर्षों से सरकारी जमीन पर खेती कर रहे हैं लेकिन अभी तक इन किसानों को सरकार की तरफ से कोई राहत नहीं दी गई है। मौसम से फसल नष्ट हो जाने पर कोई मुआवजा नहीं दिया जाता है। यहां के किसान अपनी फसल को जानवरों से सुरक्षित रखने के लिए जमीन पर पत्थर की दीवार भी नहीं बना सकते हैं। इन किसानों को अपने खेतों पर पानी के लिए ट्यूबवेल लगाने की इजाजत भी सरकार नहीं देती है।

पिछले 15 सालों से पट्टे देने पर रोक लगा हुआ है

सरकारी जमीन पर खेती कर रहे इन किसानों की मुख्य समस्या  यह है कि सरकार ने 15 सालों से अफीम के पट्टे नहीं दिए हैं। इस क्षेत्र के एक भी किसान को अभी तक अफीम का पटृटा नहीं दिया गया है। हजारों किसान ऐसे हैं जो अतिक्रमण की भूमि पर उपज उगाकर परिवार चला रहे हैं। इन किसानों को जब कांग्रेस सरकार सत्ता में आई थी तब थोड़ी पट्टे मिलने की उम्मीद जगी थी लेकिन कांग्रेस सरकार ज्यादा दिन टीक नहीं पाई। कांग्रेस ने किसानों के कर्ज और अफीम पट्टे के लिए एजेंडा तैयार किया था।

जिले के सभी किसान अफीम को लेकर है परेशान

जावद के किसान तो अफीम को लेकर परेशान हैं ही लेकिन जिले के अन्य किसानों को भी सरकार लटका ही रही है। हर वर्ष सरकार अफीम पट्टा देने का वादा करती है लेकिन आखिर में आकर किसी को पट्टे नहीं दिए जाते हैं। हालांकि इस वर्ष किसानों को उम्मीद जगी है क्योंकि मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता ने बैठक में ज्ञापन दिया है कि जिले में बहुत ही कम अफीम के पट्टे रह गए हैं। सांसद सुधीर गुप्ता ने किसानों की समस्या दूर करने के लिए वर्ष 1997 के बाद छोटे हुए सभी पट्टे देने के लिए ज्ञापन सौंपा है। इस बार संभावना जताई जा रही है कि किसानों को पट्टे मिल सकते हैं। वर्ष 1997 के किसानों को पट्टे थोड़े कम मिलने की संभावना है क्योंकि उस वर्ष ओलावृष्टि के कारण लगभग सभी किसानों की अफीम नष्ट हो गई थी।

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