किसानों के लिए पिछले 2 साल बहुत खराब साबित हुएं हैं। पिछले 2 सालों में किसानों की सारी फसलें बर्बाद हो गई थी और जितना खर्चा लगाया था उससे भी ज्यादा नुकसान हुआ था।किसानों को पिछले साल फसल का नुकसान होने का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है और इस वर्ष भी सोयाबीन पूरी तरीके से नष्ट हो गई है।अभी भी 2020 में हुए नुकसान के मुआवजे का डेढ़ लाख से अधिक किसान इंतजार कर रहे हैं। वर्ष 2021 में भी किसानों की फसलें बर्बाद हो गई है और इस वर्ष भी किसानों की फसलें बर्बाद हो गई है और इस बार भी किसानों को मुआवजे का इंतजार है।

पिछले वर्ष के मुकाबले 30 हजार किसानों ने कम बीमा करवाया है

इस वर्ष सवा लाख किसानों ने अपनी फसलों का बीमा कराया है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष लगभग 30000 किसानों ने कम बीमा कराया है। प्रशासन किसानों के नुक़सान को समझ नहीं रहा है और किसानों को बार बार बैंकों और विभागों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे किसानों का आकोश बढ़ रहा है। यही कारण रहा है कि इस बार किसानों ने बीमा करवाने में रूचि कम बताई है। संभाग में पहले जिला दूसरे नंबर पर था लेकिन अब सिर्फ 82 अऋणी किसानों ने बीमा कराया है।

डेढ़ लाख से अधिक किसानों को फसल बीमा राशि का हैं इंतजार

किसानों को 2018 और 2019 में बर्बाद हुई फसल का बीमा तो मिल गया लेकिन अभी तक डेढ़ लाख से अधिक किसानों को बीमा राशि का इंतजार है। पिछले साल खरीफ 2020 में जिले में रिकॉर्ड तोड़ किसानों ने बीमा कराया था। हालांकि किसानों को 2018 में बीमा राशि नहीं मिली थी लेकिन वर्ष 2018 और 2019 की बीमा राशि एक साथ पिछले वर्ष दे दी गई थी। यह देखकर किसानों ने फसल बीमा कराने में रुचि दिखाई थी लेकिन अभी तक पिछले वर्ष की बीमा राशि नहीं मिलने के कारण इस वर्ष किसानों ने बीमा करने में कम रुचि दिखाई है। वर्ष 2020 में अधिक बारिश होने के कारण किसानों की फसलें खराब हुई थी इसका मुआवजा अभी तक नहीं मिला है और किसान ही इंतजार कर रहे हैं।

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