यूएन की एक मौसम की रिपोर्ट में बताया गया है कि आने वाले सालों में भारत और पूरे एशिया महाद्वीप में सबसे तेजी से तापमान बढ़ेगा। पहले के सभी वर्षों की तुलना में इस बार चक्रवाती तूफान और स्थानीय गर्म हवाएं अधिक चलेगी जिसके कारण जापान में काफी तेजी आएगी। समुंद्र तट पर रहने वाले लोगों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जीवन व्यतीत करना बड़ा मुश्किल हो जाएगा। सिर्फ तापमान ही नहीं आने वाले समय में बादल फटना, सूखा पड़ना, अधिक गर्मी और चक्रवाती तूफान में आगामी वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी होगी।

आने वाले 20 वर्षो में 1.5 डिग्री बढ़ेगा तापमान

वैज्ञानिकों ने जानकारी देते हुए बताया कि यदि आने वाले समय में ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो तापमान 2 डिग्री तक बढ़ जाएगा। इसका असर धरती पर रहने वाले हर व्यक्ति, हर जानवर और पेड़ पौधों की सेहत पर भी पड़ेगा। खुलासा संयुक्त राष्ट्र संघ के इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज वर्किंग ग्रुप्स की रिपोर्ट क्लाइमेट चेंज 2021 में हुआ है। इसका एक उदाहरण है अभी सामने आ रहा है कि अर्जेंटीना के रोसारियो में पेयजल का मुख्य स्त्रोत ओल्ड पराना नदी सुखती जा रही है। वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि सबसे ज्यादा गर्म हवाओं का असर एशिया और भारत में बढ़ेगा। हैं।

वैज्ञानिकों के आंकड़े क्या बता रहे हैं

वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में बताया जा रहा है कि 1 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने से 7% ज्यादा बारिश की घटनाएं होंगी। 2000000 वर्षों में कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता सबसे अधिक हो गई है।3000 वर्षों में समुद्री जल स्तर में सबसे अधिक वृद्धि हुई है।1000 वर्षों में सबसे कम आर्केटिक समुद्री बर्फ आई है। 1000 वर्षों तक लगातार बर्फ का पिघला जारी रहेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तरी यूरोप, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अफ्रीका में भारी बारिश होगी। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि चक्रवर्ती तीव्र होंगे। जितनी अधिक बारिश और तेज हवाएं चलेंगी उतना ही तटीय क्षेत्रों में नुकसान होगा। इसके लिए विभिन्न देशों की सरकार को पहले से ही योजना बनानी होगी।

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