मंदसौर किसान के साथ धोखेबाजी: अन्य फसल के साथ मक्का पर दिया था खाद लेकिन एक महीने बाद असर तो दूर खाद गला भी नहीं, किसान ने अफजलपुर सहकारी संस्था में की शिकायत

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मंदसौर के एक किसान के साथ खाद वाले ने धोखाधड़ी कर दी है। अंचल के किसान ने अफजलपुर सहकारी संस्था में नकली खाद देने की शिकायत दर्ज कराई है क्योंकि किसान का कहना है कि उसने 1 महीने पहले खेत में खाद डालने के लिए खाद खरीदा था और उसका असर एक महीने बाद भी नहीं हुआ। खाद का असर तो दूर की बात है वह खाद 1 महीने में गला तक नहीं। मामले में अधिकारियों ने जांच करने की बात कही है। अफजलपुर निवासी अमृतराम प्रीता गणेश राम गुर्जर ने बताया कि उन्होंने 5 जुलाई को अफजलपुर सोसाइटी से 17 बीघा के लिए 14611 रुपए देकर एड फ्रॉम नामक जैविक खाद के 22 कट्टे खरीदे थे। अन्य फसलों के साथ मक्का में भी प्रत्येक पौधे पर यही खाद दिया लेकिन एक महीने बाद भी खाद लगना तो दूर वह गला तक नहीं।

खाद के कारण मक्का की फसल छोटी ही रह गई

किसान द्वारा मक्का की फसल में खाद दिया गया लेकिन मक्का की फसल में ग्रोथ होने की बजाए मक्का की फसल छोटी ही रह गई। किसान ने सोसाइटी में अमानक खाद विक्रय करने की शिकायत दर्ज कराई है। गुर्जर ने बताया कि भूमि सुधार के लिए सरकार एवं कृषि अधिकारियों द्वारा रासायनिक खाद का प्रयोग कम कर के जैविक खाद को अपनाने की समझाइश दी गई है। सोसायटी ओं में नई वैरायटी में विपणन संघ द्वारा खाद खरीद कर किसानों को बांटा जाता है जिसकी जांच होना चाहिए। जांच नहीं होने पर इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है और उसके बाद किसानों की कोई सुनवाई भी नहीं की जाती है।

अधिकारियों को मामले पर ध्यान देना चाहिए

जब किसान खाद की शिकायत लेकर अफजलपुर सोसाइटी पर गया तो वहां के प्रबंधक मन्नालाल चौहान ने बताया कि किसान ने सोसाइटी से एड फ्रॉम कंपनी का जैविक खाद खरीदा था। किसान खाद नहीं मिलने की शिकायत लेकर आए हैं लेकिन हम तो सिर्फ खाद विक्रेता है। खाद विपणन संघ खरीदता है और उसी खाद को हम किसानों को दे देते हैं। इस विषय में उच्च अधिकारियों को अवगत कराना जरूरी है क्योंकि सोसाइटी से बहुत सारे किसान खाद ले जाते हैं और उनकी फसल को कोई फायदा नहीं होता है। पहले ही किसान कई प्रकार की बीमारियों से परेशान है और इस बार फसल के बीज भी महंगे मिले हैं और अगर ऐसे में किसानों के साथ धोखाधड़ी होती है तो किसान पूरी तरह से परेशान हो जाएगा।इसलिए अधिकारियों को जैविक खाद की जांच करवानी चाहिए ताकि किसान के साथ धोखाधड़ी नहीं हो।

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