मंदसौर: फसलों के साथ पेयजल का भी संकट, अब भगवान की शरण में लोग, अमृत के लिए भजन-कीर्तन का दौर शुरू, फसले तोड़ रही है दम

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मंदसौर जिले में बारिश की लंबी खेच के बाद अब किसानों से लेकर आमजन तक के माथे पर बल पढ़ना शुरू हो गए हैं। जुलाई में तेज धूप निकल रही है और बारिश के बादल गायब हो रहे हैं। इससे फसलों के साथ ही पेयजल का संकट भी शुरू हो गया है। जगह जगह भगवान की शरण में लोग पहुंचने लगे हैं और अमृत रूपी पानी के लिए भगवान का भजन कीर्तन कर रहे हैं। शहर में बढ़ता जल संकट के चलते कहार भोई समाज द्वारा 18 जुलाई खिड़की माता मंदिर परिसर बाईपास पर पूजन आरती, मोहन भोग आदि कार्य उजमनी मनाई जाएगी। कहार भोई समाज विकास समिति के मनोहर लाल चौहान ने बताया कि इस वर्ष मंदसौर व आसपास क्षेत्र में अच्छी बारिश नहीं हुई जिससे जल संकट की स्थिति निर्मित हो गई है। ऐसे में कहार भोई समाज द्वारा उजमनी मनाई जाएगी।

खाती समाज की महिलाओं ने किया जलाभिषेक

गरोठ में बारिश के लिए किए जा रहे जतन के तहत क्षत्रिय खाती समाज की महिलाओं ने अच्छी बारिश की कामना के लिए नगर में कीर्तन करते हुए जुलूस निकाला। भगवान श्रीराम का जलाभिषेक भी किया। बारिश के अभाव में फसलें दम तोड़ रही है। कुछ लोगों ने बोवनी के बाद भी खेत हकवा दिए हैं। ऐसी चिंताजनक स्थिति को लेकर अच्छी बारिश की कामनाएं लिए क्षत्रिय खाती समाज की महिलाओं ने रीति रिवाज अनुसार क्षत्रिय खाती समाज के श्री राम मंदिर से बैंड और डीजे के साथ जुलूस निकाला। समाज की संजू रावत ने बताया कि पुरानी परिपाटी अनुसार एक महिला को धोती कुर्ता और साफा पहनाकर सभी महिलाएं भजन कीर्तन करते हुए नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए बोलिया रोड स्थित नदी पर पहुंची। नदी के तट पर क्षेत्र में अच्छी बारिश की कामना को लेकर पूजा अर्चना कर जल लेकर श्री राम मंदिर पर आए और जलाभिषेक किया।

खेड़ा देव पूजन भी किया गया

नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में अच्छी बारिश की कामना करते हुए शामगढ़ के खेड़ा देव जी महाराज का पूजन भी किया गया। सभी लोगों को सुबह 7:00 बजे माताजी मंदिर शामगढ़ गांव पर एकत्र होने का आह्वान किया गया था। नगर परिषद कार्यालय में सीएमओ जगदीश जी दानगढ़ की अध्यक्षता में नगर की खेड़ा देव पूजन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसी के साथ भानपुरा व्यापार संघ ने बारिश को लेकर स्वैच्छिक रूप से नगर बंद रखकर उजमनी मनाई। भानपुरा व्यापार संघ ने आह्वान किया कि वर्षा काल के समय पर बरसात नहीं होने से भीषण गर्मी से राहत के साथ ही खरीफ फसल के लिए अमृत वर्षा और क्षेत्रवासियों की खुशहाली के लिए रूठे हुए भगवान इंद्रदेव को मनाने के लिए पूरा नगर बंद रखा जाए।

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