रामलला को ठंड से बचाने के लिए पहनाएं गए ऊनी वस्त्र,रजाई भी ओढ़ाई और ब्लोअर भी लगाया गया

 

इस कड़ाके की ठंड में अयोध्या नगरी में रामलला को भी ठंड से बचाने के लिए तरह-तरह के  तरीके अपनाएं जा रहें हैं। आंकड़ों के अनुसार इस बार ठंड में ज्यादा ताकत रहेगी यांनी इस बार ठंड रिकॉर्ड तोड़ सकती है।

सभी देवताओं के लिए की गई है ठंड से बचने की व्यवस्था

मंदिर में रामलला के लिए दरबार में ब्लोअर लगाया गया है। मंदिर के और भी भगवान को ऊनी वस्त्र, रजाई व कंबल उठाया जा रहा है तो कहीं गर्भ ग्रह में ब्लोअर के माध्यम से भगवान को ठंड से बचाया जा रहा है। भगवान के भोग श्रंगार और आरती में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। भगवान के सोने और उठने का समय भी मौसम के अनुसार बदल गया है।भगवान के भोग, शृंगार- आरती में भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है। भगवान राम जी के पास 24 घंटे ब्लोअर चलता है जिससे गर्भ ग्रह गर्म रहे और भगवान को ठंड का एहसास ना हो। पानी से ठंड लग जाने के डर से रामलला को फूलों से ही स्नान कराया जा रहा है।

भगवान रामलला बाल रूप में विराजमान है

पुजारी श्री आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि अयोध्या में रामलला बाल रूप में विराजमान है इसलिए उनको ठंड से बचाने के लिए समुचित उपाय किए गए हैं। ठंड के हिसाब से उनको भोग भी दिया जा रहा है। रामलला के इत्र का लेप भी किया जाता है। आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा है कि गर्म हवा देने वाली मशीन भी लगाई गई है और मौसम के हिसाब से रामलीला को भोग लगाया जाता है।

क्या था मामला

आपको बता दें कि 1992 के बाद अयोध्या के रामलला परिसर में तमाम पाबंदियों थी बहुत केस चल रहे थे। सभी व्यवस्थाएं पहले केंद्र सरकार के हाथ में थी और कुछ गर्म कपड़े और रजाई एक मात्र साधन था। लेकिन अब यह व्यवस्था राम जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट के अधीन हो गया है। अब पुजारियों ने रामलला के भोग और रखरखाव की प्रशंसा की है और संतोष व्यक्त किया है। ट्रस्ट अब हर चीज समय पर उपलब्ध करवा देता है।

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