अवकाश के दिन भी अनाज लेकर पहुंचे किसान, ऊंचे दामों के कारण काफी दूर-दूर से आ रहे हैं किसान

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मंदसौर मंडी में रविवार को अवकाश होने के बावजूद भी किसान अपना उपज लेकर मंडी पहुंचे जिससे रविवार के दिन ही मंडी में जगह लहसुन और प्याज से पूरी तरह भर गई। जो किसान आज आए हैं उनको अब रविवार को आने वाले किसानों के अनाज नीलाम होने पर जगह मिलेगी। लहसुन में तेजी आ जाने के कारण लहसुन की आवक अचानक बढ़ गई और दूर-दूर से किसान अनाज लेकर मंडी में पहुंच रहे हैं।

कई किलोमीटर दूर से आ रहे हैं किसान

शहर के रेलवे स्टेशन रोड पर स्थित कृषि उपज मंडी मैं अभी प्याज और लहसुन की बंपर आवक हो रही है। दूसरी मंडियों की तुलना में मंदसौर में लहसुन और प्याज के दाम ज्यादा होने के कारण लगभग 350 से भी ज्यादा किलोमीटर दूर के किसान अपना अनाज लेकर आ रहे हैं। मंदसौर मंडी का नाम प्रदेश की बड़ी मंडियों में चलता है। मंदसौर मंडी में से रोज लगभग 60 से अधिक जिंसों का व्यापार होता है। यहां पर प्रतिदिन 20 से 30000 बोरी की आवक होती है।

मंडी में प्रतिदिन 15 से 20 करोड़ का कारोबार होता है। मंडी को भी इससे डेढ़ लाख रुपए तक की रोज राजस्व के रूप में आमदनी होती है। लहसुन और प्याज के रूप में भी मंडी की अलग पहचान है। मंडी में किसानों को उपज के दाम अच्छे मिलने से राजस्थान और दूर-दूर से किसान यहां पर आते हैं। बंपर आवक होने के कारण किसानों को माल बिकने तक कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है।

350 किलोमीटर दूर से आया किसान

भीड़ होने के डर के कारण किसान रविवार को ही अपना उपज मंडी में लेकर पहुंच गए। सुनेल के एक किसान पवन बन्ना ने बताया कि मैं 350 किलोमीटर दूर से आया हूं और मुझे यहां पर रात की सुरक्षा व्यवस्था अच्छी लगी। यहां पर रात में भी मंडी कर्मचारी तैनात रहते हैं जिससे डर नहीं लगता और आसपास दुकाने होने से सभी चीजें आसानी से मिल जाती है। यहां तक लहसुन लाने के लिए उन्हें ₹325 प्रति क्विंटल का भाड़ा लगता है लेकिन भाव अच्छे मिल जाने के कारण नुकसान नहीं होता।

धार के किसान दिनेश यादव ने बताया कि इस मंडी में दूसरी मंडियों की तुलना में भाव बहुत अच्छे मिल जाते हैं जिसके कारण हम प्रतिवर्ष लहसुन यहां पर ही बेचने के लिए आते हैं। धार मंडी से लगभग 250 किलोमीटर दूर है और यहां से भी ढाई सौ रुपए प्रति क्विंटल का भाड़ा लगता है।

सुरक्षा के बेहतर इंतजाम होने के कारण किसान यहां पर अपने माल को लेकर आते हैं और कुछ दिन रुको भी जाते हैं।

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